Sunday, 27 August 2017

‘मन की बात’ (प्रसारण तिथि: 27.08.2017)

मेरे प्यारे देशवासियो, सादर नमस्कार| एक तरफ देश उत्सवों में डूबा हुआ है  और दूसरी तरफ से हिन्दुस्तान के किसी कोने से जब हिंसा की खबरें आती हैं तो देश को चिंता होना स्वाभाविक है| ये हमारा देश बुद्ध और गांधी का देश  है,  देश की एकता के लिए जी-जान लगा देने वाले सरदार पटेल का देश है| सदियों से हमारे पूर्वजों  ने  सार्वजनिक जीवन-मूल्यों को, अहिंसा को, समादर को स्वीकार किया हुआ है,  हमारी ज़हन में भरा हुआ है |  अहिंसा परमो धर्म:, ये हम बचपन से सुनते आये हैं, कहते आये हैं |  मैंने लाल किले से भी कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी, चाहे वो सांप्रदायिक आस्था हो, चाहे वो राजनैतिक विचार धाराओं के प्रति आस्था हो, चाहे वो व्यक्ति के प्रति आस्था हो, चाहे वो परम्पराओं के प्रति आस्था हो, आस्था के नाम पर, कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है| डॉ बाबा साहब आंबेडकर ने हमें जो संविधान दिया है उसमे हर व्यक्ति को न्याय पाने की हर प्रकार की व्यवस्था है| मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूँ, कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी, चाहे वो व्यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी | हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा, कानून ज़बाबदेही तय करेगा और दोषियों को सज़ा दे के रहेगा |
मेरे प्यारे देशवासियो, हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है और ये विविधताएँ खान-पान, रहन-सहन, पहनाव वहाँ तक सीमित नहीं है | जीवन के हर व्यवहार में हमें विविधताएँ नजर आती हैं | यहाँ तक कि हमारे त्योहार भी विविधताओं से भरे हुए हैं और हज़ारों साल पुरानी हमारी सांस्कृतिक विरासत होने के कारण सांस्कृतिक  परम्पराएँ देखें, सामाजिक परम्पराएँ देखें, ऐतिहासिक घटनायें देखें तो शायद ही 365 दिन में कोई दिन बचता होगा जबकि हमारे यहाँ कोई त्योहार से न जुड़ा हुआ हो | अब ये भी आपने देखा होगा कि हमारे सारे त्योहार, प्रकृति के समय पत्रक के अनुसार चलते हैं | प्रकृति के साथ सीधा-सीधा संबंध आता है | हमारे बहुत सारे त्योहार तो सीधे-सीधे किसान से जुड़े हुए होते हैं, मछुआरों से जुड़े हुए होते हैं |
आज मैं त्योहारों की बात कर रहा हूँ तो सबसे पहले मैं आप सबको मिच्छामि दुक्कड़म कहना चाहूँगा | जैन समाज में कल संवत्सरी का पर्व मनाया गया | जैन समाज में भाद्र मास में पर्युषण पर्व मनाया जाता है | पर्युषण पर्व के आख़िरी दिन संवत्सरी का दिन होता है | ये सचमुच में अपने आप में एक अद्भुत परम्परा है | संवत्सरी का पर्व क्षमा, अहिंसा और मैत्री का प्रतीक है | इसे एक प्रकार से क्षमा-वाणी पर्व भी कहा जाता है और इस दिन एक दूसरे को मिच्छामि दुक्कड़म कहने की परंपरा है | वैसे भी हमारे शास्त्रों में ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्’ यानि क्षमा वीरों का भूषण है | क्षमा करने वाला वीर होता है | ये चर्चा तो हम सुनते ही आए हैं और महात्मा गाँधी तो हमेशा कहते थे - क्षमा करना तो ताकतवर व्यक्ति की विशेषता होती है |
शेक्सपियर ने अपने नाटक ‘The Merchant of Venice’ में क्षमा भाव के महत्त्व को बताते हुए लिखा था – “Mercy is twice blest, It blesseth him that gives and him that takes” अर्थात् क्षमा करने वाला और जिसे क्षमा किया गया, दोनों को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है|
मेरे प्यारे देशवासियो, इन दिनों हिन्दुस्तान के हर कोने में गणेश चतुर्थी की धूम मची हुई है और जब गणेश चतुर्थी की बात आती है तो सार्वजनिक-गणेशोत्सव की बात स्वाभाविक है | बालगंगाधर लोकमान्य तिलक ने 125 साल पूर्व इस परंपरा को जन्म दिया और पिछले 125 साल आज़ादी के पहले वो आज़ादी के आन्दोलन का प्रतीक बन गए थे | और आज़ादी के बाद वे समाज-शिक्षा, सामाजिक-चेतना जगाने के प्रतीक बन गये हैं | गणेश चतुर्थी का पर्व 10 दिनों तक चलता है | इस महापर्व को एकता, समता और शुचिता का प्रतीक कहा जाता है | सभी देशवासियों को गणेशोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |
अभी केरल में ‘ओणम’ का त्योहार मनाया जा रहा है | भारत के रंग-बिरंगे त्योहारों में से एक ‘ओणम’ केरल का एक प्रमुख त्योहार है | यह पर्व अपने सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व के लिए जाना जाता है | ओणम का पर्व, केरल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है | यह पर्व समाज में प्रेम और सौहार्द का सन्देश देने के साथ-साथ लोगों के मन में एक नयी उमंग, नयी आशा, नया विश्वास जागृत करता है | और अब तो हमारे ये त्योहार भी, tourism के आकर्षण का भी कारण बनते जा रहे हैं | और मैं तो देशवासियों से कहूँगा कि जैसे गुजरात में नवरात्रि का उत्सव या बंगाल में दुर्गा उत्सव - एक प्रकार से tourism का आकर्षण बन चुके हैं | हमारे और त्योहार भी, विदेशियों को आकर्षित करने के लिये एक अवसर हैं | उस दिशा में हम क्या कर सकते हैं, सोचना चाहिये |
इन त्योहारों की श्रृंखला में कुछ ही दिन बाद देश भर में ‘ईद-उल-जुहा’ का पर्व भी मनाया जाएगा | सभी देशवासियों को ‘ईद-उल-जुहा’ की बहुत-बहुत बधाइयाँ, बहुत शुभकामनाएँ | त्योहार हमारे लिए आस्था और विश्वास के प्रतीक तो हैं ही, हमें नये भारत में त्योहारों को स्वच्छता का भी प्रतीक बनाना है | पारिवारिक जीवन में तो त्योहार और स्वच्छता जुड़े हुए हैं | त्योहार की तैयारी का मतलब है - साफ़-सफाई | ये हमारे लिए कोई नयी चीज़ नहीं है लेकिन ये सामाजिक स्वभाव बनाना भी ज़रूरी है | सार्वजनिक रूप से स्वच्छता का आग्रह सिर्फ़ घर में नहीं, हमारे पूरे गाँव में, पूरे नगर में, पूरे शहर में, हमारे राज्य में, हमारे देश में – स्वच्छता, ये त्योहारों के साथ एक अटूट हिस्सा बनना ही चाहिये |
    मेरे प्यारे देशवासियो, आधुनिक होने की परिभाषाएँ बदलती चली जा रही हैं | इन दिनों एक नया dimension, एक नया parameter, आप कितने संस्कारी हो, कितने आधुनिक हो, आपकी thought-process कितनी modern है, ये सब जानने में एक तराजू भी काम में आने लगा है और वो है environment के प्रति आप कितने सजग हैं | आपके अपनी गतिविधियों में eco-friendly, environment-friendly व्यवहार है कि उसके खिलाफ़ है | समाज में अगर उसके ख़िलाफ़ है तो आज बुरा माना जाता है | और उसी का परिणाम आज मैं देख रहा हूँ कि इन दिनों ये गणेशोत्सव में भी eco-friendly गणपति, मानो एक बड़ा अभियान खड़ा हो गया है | अगर आप You Tube पर जा करके देखेंगे, हर घर में बच्चे गणेश जी बना रहे हैं, मिट्टी ला करके गणेश जी बना रहे हैं | उसमें रंग पुताई कर रहे हैं | कोई vegetable के colour लगा रहा है, कोई कागज़ के टुकड़े चिपका रहा है | भांति-भांति के प्रयोग हर परिवार में हो रहे हैं | एक प्रकार से environment consciousness का इतना बड़ा व्यापक प्रशिक्षण इस गणेशोत्सव में देखने को मिला है, शायद ही पहले कभी मिला हो | Media house भी बहुत बड़ी मात्रा में eco friendly गणेश की मूर्तियों के लिए लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, प्रेरित कर रहे हैं, guide कर रहे हैं | देखिए कितना बड़ा बदलाव आया है और ये सुखद बदलाव है | और जैसा मैंने कहा हमारा देश, करोड़ों - करोड़ों तेजस्वी दिमागों से भी भरा हुआ है | और बड़ा अच्छा लगता है जब कोई नये-नये innovation जानते हैं | मुझे किसी ने बताया कि कोई एक सज्जन हैं जो स्वयं engineer हैं, उन्होंने एक विशिष्ट प्रकार से मिट्टी इकट्ठी करके, उसका combination करके, गणेश जी बनाने की training लोगों की और वो एक छोटी से बाल्टी में, पानी में गणेश विसर्जन होता है तो उसी में रखते हैं तो पानी में तुरंत dilute हो जाती है | और उन्होंने यहाँ पर रुके नहीं हैं उसमें एक तुलसी का पौधा बो दिया और पौधे बो दिए | तीन वर्ष पूर्व जब स्वच्छता का अभियान प्रारंभ किया था, 2 अक्टूबर को उसको तीन साल हो जायेंगे | और, उसके सकारात्मक परिणाम नज़र आ रहे हैं | शौचालयों की coverage 39% से करीब-करीब 67% पहुँची हैं | 2 लाख 30 हज़ार से भी ज्यादा गाँव, खुले में शौच से अपने आपको मुक्त घोषित कर चुके हैं |

          पिछले दिनों गुजरात में भयंकर बाढ़ आई | काफ़ी लोग अपनी जान गंवा बैठे लेकिन बाढ़ के बाद जब पानी कम हुआ तो हर जगह इतनी गन्दगी फ़ैल गई थी | ऐसे समय में गुजरात के बनासकांठा ज़िले के धानेरा में, जमीयत उलेमा–ए–हिन्द के कार्यकर्ताओं ने बाढ़ - प्रभावित 22 मंदिरों एवं 3 मस्जिदों की चरणबद्ध तरीक़े से साफ़-सफ़ाई की | ख़ुद का पसीना बहाया, सब लोग निकल पड़े | स्वच्छता के लिए एकता का उत्तम उदाहरण, हर किसी को प्रेरणा देने वाला ऐसा उदाहरण, जमीयत उलेमा–ए–हिन्द के सभी कार्यकर्ताओं ने दिया | स्वच्छता के लिए समर्पण भाव से किया गया प्रयास, ये अगर हमारा स्थायी स्वभाव बन जाए तो हमारा देश कहाँ से कहाँ पहुँच सकता है |

    मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आप सभी से एक आह्वान करता हूँ कि एक बार फिर 2 अक्टूबर गाँधी जयंती से 15-20 दिन पहले से ही ‘स्वच्छता ही सेवा’ - जैसे पहले कहते थे ‘जल सेवा यही प्रभु सेवा’, ‘स्वच्छता ही सेवा’ की एक मुहिम चलायें | पूरे देश में स्वच्छता के लिए माहौल बनाएं | जैसा अवसर मिले, जहाँ भी अवसर मिले, हम अवसर ढूंढें | लेकिन हम सभी जुड़ें | इसे एक प्रकार से दिवाली की तैयारी मान लें, इसे एक प्रकार से नवरात्र की तैयारी मान लें, दुर्गा पूजा की तैयारी मान लें | श्रमदान करें | छुट्टी के दिन या रविवार को इकठ्ठा हो कर एक-साथ काम करें | आस-पड़ोस की बस्ती में जायें, नज़दीक के गाँव में जायें, लेकिन एक आन्दोलन के रूप में करें | मैं सभी NGOs को, स्कूलों को, colleges को, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक नेतृत्व को, सरकार के अफसरों को, कलेक्टरों को, सरपंचों को हर किसी से आग्रह करता हूँ कि 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जन्म-जयंती के पहले ही, 15 दिन, हम एक ऐसी स्वच्छता का वातावरण बनाएं, ऐसा स्वच्छता खड़ी कर दें कि 2 अक्टूबर सचमुच में गाँधी के सपनों वाली 2 अक्टूबर हो जाए | पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, MyGov.in पर एक section बनाया है जहाँ शौचालय निर्माण के बाद आप अपना नाम और उस परिवार का नाम प्रविष्ट कर सकते हैं, जिसकी आपने मदद की है | मेरे social media के मित्र कुछ रचनात्मक अभियान चला सकते हैं और virtual world का   धरातल पर काम हो, उसकी प्रेरणा बना सकते हैं | स्वच्छ-संकल्प से स्वच्छ-सिद्धि प्रतियोगिता, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा ये अभियान जिसमें आप निबंध की स्पर्धा है, लघु-फिल्म बनाने की स्पर्धा है, चित्रकला-प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है | इसमें आप विभिन्न भाषाओँ में निबंध लिख सकते हैं और उसमें कोई उम्र की मर्यादा नहीं है, कोई age limit नहीं है | आप short film बना सकते हैं, अपने mobile से बना सकते हैं | 2-3 मिनट की फिल्म बना सकते हैं जो स्वच्छता के लिए प्रेरणा दे | वो किसी भी language में हो सकती है, वो silent भी हो सकती है | ये जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे उसमें से जो best तीन लोग चुने जायेंगे, district level पर तीन होंगे, state level पर तीन होंगे उनको पुरस्कार दिया जाएगा | तो मैं हर किसी को निमंत्रण देता हूँ कि आइये, स्वच्छता के इस अभियान के इस रूप में भी आप जुड़ें |
    मैं फिर एक बार कहना चाहता हूँ कि इस बार 2 अक्टूबर गाँधी जयंती को ‘स्वच्छ 2 अक्टूबर’ मनाने का संकल्प करें और इसके लिए 15 सितम्बर से ही ‘स्वच्छता ही सेवा’ इस मंत्र को घर-घर पहुंचायें | स्वच्छता के लिए कोई-न-कोई कदम उठाएँ | स्वयं परिश्रम करके इसमें हिस्सेदार बनें | आप देखिए, गाँधी जयंती की ये 2 अक्टूबर कैसी चमकेगी | आप कल्पना कर सकते हैं 15 दिन के सफ़ाई के इस अभियान के बाद, ‘स्वच्छता ही सेवा’ के बाद, 2 अक्टूबर को जब हम गाँधी जयंती मनाएगें तो पूज्य बापू को श्रद्धांजलि देने का हमारे भीतर कितना एक पवित्र आनंद होगा | 
    मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आज एक विशेष रूप से आप सब का ऋण स्वीकार करना चाहता हूँ | ह्रदय की गहराई से मैं आप का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, इसलिए नहीं कि इतने लम्बे अरसे तक आप ‘मन की बात’ से जुड़े रहे | मैं इसलिए आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, ऋण स्वीकार करना चाहता हूँ क्योंकि ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के साथ देश के हर कोने से लाखों लोग जुड़ जाते हैं | सुनने वालों की संख्या तो करोड़ों में है, लेकिन लाखों लोग मुझे कभी पत्र लिखते हैं, कभी message देते हैं, कभी फ़ोन पे सन्देश आ जाता है, मेरे लिए एक बहुत बड़ा खज़ाना है | देश के जन-जन के मन को जानने के लिए ये मेरे लिए एक बहुत बड़ा अवसर बन गया है | आप जितना ‘मन की बात’ का इंतज़ार करते हैं उससे ज़्यादा मैं आपके संदेशों का इंतज़ार करता हूँ | मैं लालायित रहता हूँ क्योंकि आप की हर बात से मुझे कुछ सीखने को मिलता है | मैं जो कर रहा हूँ उसको कसौटी पर कसने का अवसर मिल जाता है | बहुत-सी बातों को नये तरीक़े से सोचने के लिए आपकी छोटी-छोटी बातें भी मुझे काम आती हैं और इसलिए मैं आपके इस योगदान के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ, आपका ऋण स्वीकार करता हूँ और मेरे प्रयास रहता है कि ज़्यादा-से-ज़्यादा आपकी बातों को मैं स्वयं देखूँ, सुनूँ, पढूँ, समझूँ और ऐसी-ऐसी बातें आती हैं | अब देखिये, अब इस phone call से आप भी अपने आपको co-relate करते होंगे | आपको भी लगता होगा हाँ यार, आपने कभी ऐसी गलती की है | कभी-कभी तो कुछ चीज़ें हमारी आदत का ऐसा हिस्सा बन जाती हैं कि हमें लगता ही नहीं है कि हम ग़लत करते हैं |
‘‘प्रधानमंत्री जी, मैं पूना से अपर्णा बोल रही हूँ | मैं अपनी एक सहेली के बारे में बताना चाहती हूँ | वो हमेशा लोगों की मदद करने की कोशिश करती है लेकिन उसकी एक आदत देखकर मैं हैरान हो जाती हूँ | मैं एक बार उसके साथ शॉपिंग करने मॉल गयी थी | एक साड़ी पर उसने दो हज़ार रूपये बड़े आराम से खर्च कर दिए और पीज़ा पर 450/- रूपये, जबकि मॉल तक जाने के लिए जो ऑटो लिया था, उस ऑटो वाले से बहुत देर तक पाँच रूपये के लिए मोल-भाव करती रही | वापस लौटते हुए रास्ते में सब्जी खरीदी और हर सब्जी पर फिर से मोल-भाव करके 4-5 रूपये बचाये | मुझे बहुत बुरा लगता है | हम बड़ी-बड़ी जगह एक बार भी बिना पूछे बड़े-बड़े भुगतान कर देते हैं और हमारे मेहनतकश भाई-बहनों से थोड़े से रुपयों के लिए झगड़ा करते हैं | उन पर अविश्वास करते हैं | आप अपनी ‘मन की बात’ में इस बारे में ज़रूर बताएँ |”’’
अब ये phone call सुनने के बाद, मुझे पक्का विश्वास है कि आप चौंक भी गये होंगे, चौकन्ने भी हो गये होंगे और हो सकता है आगे से ऐसी गलती न करने का मन में तय भी कर लिये होंगे | क्या आपको नहीं लगता है कि जब हम, हमारे घर के आस-पास कोई सामान बेचने के लिए आता है, कोई फेरी लगाने वाला आता है, किसी छोटे दुकानदार से, सब्ज़ी बेचने वालों से हमारा संबंध आ जाता है, कभी ऑटो-रिक्शा वाले से संबंध आता है - जब भी हमारा किसी मेहनतकश व्यक्ति के साथ संबंध आता है तो हम उससे भाव का तोल-मोल करने लग जाते हैं, मोल-भाव करने लग जाते हैं - नहीं इतना नहीं, दो रूपया कम करो, पाँच रुपया कम करो | और हम ही लोग किसी बड़े restaurant में खाना खाने जाते हैं तो बिल में क्या लिखा है देखते भी नहीं हैं, धड़ाम से पैसे दे देते हैं | इतना ही नहीं showroom में साड़ी ख़रीदने जायें, कोई मोल-भाव नहीं करते हैं लेकिन किसी ग़रीब से अपना नाता आ जाये तो मोल-भाव किये बिना रहते नहीं हैं | ग़रीब के मन को क्या होता होगा, ये कभी आपने सोचा है ? उसके लिए सवाल दो रूपये - पांच रूपये का नहीं है | उसके ह्रदय को चोट पहुँचती है कि आपने वो ग़रीब है इसलिए उसकी ईमानदारी पर शक किया है | दो रूपया - पांच रूपया आपके जीवन में कोई फ़र्क नहीं पड़ता है लेकिन आपकी ये छोटी-सी आदत उसके मन को कितना गहरा धक्का लगाती होगी कभी ये सोचा है ? मैडम, मैं आप का आभारी हूँ आपने इतना ह्रदय को छूने वाला phone call करके एक message मुझे दिया | मुझे विश्वास है कि मेरे देशवासी भी ग़रीब के साथ ऐसा व्यवहार करने की आदत होगी तो ज़रुर छोड़ देंगे|
मेरे प्यारे नौजवान साथियो, 29 अगस्त को पूरा देश राष्ट्रीय खेल-दिवस के रूप में मनाता है | ये महान hockey player और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी का जन्मदिवस है | हॉकी के लिए उनका योगदान अतुलनीय था | मैं इस बात का स्मरण इसलिए करा रहा हूँ कि मैं चाहता हूँ कि हमारे देश की नई पीढ़ी, खेल से जुड़े | खेल हमारे जीवन का हिस्सा बने | अगर हम दुनिया के युवा देश हैं तो हमारी ये तरुणाई खेल के मैदान में भी नज़र आनी चाहिए | Sports यानि physical fitness, mental alertness, personality enhancement मैं समझता हूँ कि इससे ज्यादा क्या चाहिए ? खेल एक प्रकार से दिलों के मेल की एक बहुत बड़ी जड़ी-बूटी है | हमारी देश की युवा पीढ़ी खेल जगत में आगे आए और आज computer के युग में तो मैं आगाह भी करना चाहूँगा कि playing field, play-station से ज्यादा महत्वपूर्ण है | computer पर FIFA खेलिये लेकिन बाहर मैदान में भी तो कभी football के साथ करतब करके दिखाइये | computer पर cricket खेलते होंगे लेकिन खुले मैदान में आसमान के नीचे cricket खेलने का आनंद कुछ और होता है | एक समय था जब परिवार के बच्चे बाहर जाते थे तो माँ पहले पूछती थी कि तुम कब वापिस आओगे | आज हालत ये हो गई है कि बच्चे घर में आते ही एक कोने में या तो cartoon film देखने में लग जाते हैं या तो mobile game पर चिपक जाते हैं और तब माँ को चिल्ला करके कहना पड़ता है - तू कब बाहर जाएगा | वक़्त-वक़्त की बात है, वो भी एक ज़माना था जब माँ बेटे को कहती थी कि तुम कब आओगे और आज ये हाल है कि माँ को कहना पड़ता है बेटा तुम बाहर कब जाओगे?
   नौजवान दोस्तो, खेल मंत्रालय ने खेल प्रतिभा की खोज और उन्हें निखारने के लिए एक Sports Talent Search Portal तैयार किया है, जहाँ पूरे देश से कोई भी बच्चा जिसने खेल के क्षेत्र में कुछ उपलब्द्धि हासिल की है, उनमें Talent हो - वो इस portal पर अपना Bio-Data या video upload कर सकता है | Selected emerging players को खेल मंत्रालय training देगा और मंत्रालय कल ही इस portal को launch करने वाला है | हमारे नौजवानों के लिए तो खुशी की खबर है कि भारत में 6 से 28 अक्टूबर तक FIFA Under 17 World Cup का आयोजन होने जा रहा है I दुनिया भर से 24 टीमें भारत को अपना घर बनाने जा रही हैं |
    आइये, विश्व से आने वाले हमारे नौजवान मेहमानों का, खेल के उत्सव के साथ स्वागत करें, खेल को enjoy करें, देश में एक माहौल बनाएं | जब मैं आज खेल की बात कर रहा हूँ तो मैं पिछले हफ्ते एक मेरे मन को बड़ी ही छू जाने वाली घटना घटी | देशवासियों के साथ share करना चाहता हूँ | मुझे बहुत ही छोटी आयु की कुछ बेटियों से मिलने का मौका मिला और उसमें से कुछ बेटियां तो हिमालय में पैदा हुई थी | समंदर से जिनका कभी नाता भी नहीं था | ऐसी हमारी देश की छ: बेटियां जो Navy  में काम करती हैं - उनका जज़्बा, उनका हौसला हम सब को प्रेरणा देने वाला है | ये छ: बेटियां, एक छोटी-सी boat लेकर करके INS Tarini (तारिणी) उसको लेकर कर के समुन्द्र पार करने के लिए निकल पड़ेगी | इस अभियान का नाम दिया गया है ‘नाविका सागर परिक्रमा’ और वे पूरे विश्व का भ्रमण करके महीनों के बाद, कई महीनों के बाद भारत लौटेगी | कभी एक साथ 40-40 दिन पानी में बिताएगी | कभी-कभी 30-30 दिन पानी में बिताएगी | समुन्द्र की लहरों के बीच साहस के साथ हमारी ये छ: बेटियां और ये विश्व में पहली घटना हो रही है | कौन हिंदुस्तानी होगा जिन्हें हमारी इन बेटियों पर नाज़ न हो ! मैं इन बेटियों के जज़्बे को सलाम करता हूँ और मैंने उनसे कहा है कि वो पूरे देश के साथ अपने अनुभवों को साझा करें | मैं भी NarendraModi App पर उनके अनुभवों के लिए एक अलग व्यवस्था करूँगा ताकि आप ज़रूर उसे पढ़ पाएं क्योंकि ये एक प्रकार से ये साहस कथा है, स्वानुभव की कथा होगी और मुझे खुशी होगी इन बेटियों की बातों को आप तक पहुंचाने में | मेरी इन बेटियों को बहुत-बहुत शुभकामना है, बहुत-बहुत आशीर्वाद है |
मेरे प्यारे देशवासियो, 5 सितम्बर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं | हमारे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस है | वे राष्ट्रपति थे लेकिन जीवन भर अपने आप को एक शिक्षक के रूप में ही वो प्रस्तुत करते थे | वो हमेशा शिक्षक के रूप में ही जीना पसंद करते थे | वे शिक्षा के प्रति समर्पित थे | एक अध्येता, एक राजनयिक, भारत के राष्ट्रपति लेकिन हर पल एक जीते-जागते शिक्षक | मैं उनको नमन करता हूँ |
महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था It is the supreme art of the teacher to awaken joy in creative expression and knowledge. अपने छात्रों में सृजनात्मक भाव और ज्ञान का आनंद जगाना ही एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण गुण है | इस बार जब हम शिक्षक दिवस मनाएँ | क्या हम सब मिलकर के एक संकल्प कर सकते हैं ? एक mission mode में एक अभियान चला सकते हैं ? Teach to Transform, Educate to Empower, Learn to Lead इस संकल्प के साथ इस बात को आगे बढ़ा सकते हैं क्या? हर किसी को 5 साल के लिए, किसी संकल्प से बांधिए, उसे सिद्ध करने का रास्ता दिखाइये और 5 साल में वो पाकर के रहे, जीवन में सफ़ल होने का आनंद पाये - ऐसा माहौल हमारे स्कूल, हमारे कॉलेज, हमारे शिक्षक, हमारे शिक्षा संस्थान ये कर सकते हैं और हमारे देश में जब हम transformation की बात करते हैं तो जैसे परिवार में माँ की याद आती है वैसे ही समाज में शिक्षक की याद आती है | transformation में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका रहती है | हर शिक्षक के जीवन में कहीं-न-कहीं ऐसी घटनाएँ हैं कि जिसके सहज़ प्रयासों से किसी की ज़िन्दगी के transformation में सफ़लता मिली होगी | अगर हम सामूहिक प्रयास करेंगे तो राष्ट्र के transformation में हम बहुत बड़ी भूमिका अदा करेंगे | आइये teach to transform इस मंत्र को लेकर के चल पड़ें |
    ‘‘प्रणाम प्र”धानमंत्री जी | मेरा नाम है डॉक्टर अनन्या अवस्थी | मैं मुम्बई शहर की निवासी हूँ और Howard University के India Research Centre के लिये काम करती हूँ | एक researcher के तौर पर मेरी विशेष रूचि रही है वित्तीय समावेश में, जिसको हम financial inclusion इनसे related social schemes को लेकर और मेरा आपसे प्रश्न ये है कि 2014 में जो जनधन योजना launch हुई क्या आप कह सकते हैं, क्या आँकड़े ये दिखाते हैं कि आज तीन साल बाद भारतवर्ष financially  ज्यादा secure है या ज्यादा सशक्त है और क्या ये सशक्तिकरण और सुविधायें हमारी महिलाओं को, किसानों को, मजदूरों को गाँव और कस्बों तक भी प्राप्त हो पायी हैं | धन्यवाद |’’  
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ financial inclusion, ये भारत में ही नहीं पूरे विश्व में आर्थिक जगत के पंडितों की चर्चा का विषय रहा है | 28 अगस्त, 2014 को मन में एक सपना ले करके इस अभियान को प्रारंभ किया था | कल 28 अगस्त को इस ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के अभियान को तीन साल हो रहे हैं | 30 करोड़ नये परिवारों को इसके साथ जोड़ा है, bank account खोला है | दुनिया के कई देशों की आबादी से भी ज़्यादा ये नंबर है | आज मुझे एक बहुत बड़ा समाधान है कि तीन साल के भीतर-भीतर समाज के उस आख़िरी छोर पर बैठा हुआ मेरा ग़रीब भाई, देश की अर्थव्यवस्था के मूल-धारा का हिस्सा बना है, उसकी आदत बदली है, वो bank में आने-जाने लगा है, वो पैसों की बचत करने लगा है, वो पैसों की सुरक्षा महसूस कर रहा है | कभी पैसे हाथ में रहते हैं, ज़ेब में रहते हैं, घर में हैं तो फ़ालतू ख़र्च करने का मन कर जाता है | अब एक संयम का माहौल बना है और धीरे-धीरे उसको भी लगने लगा है कि पैसे कहीं बच्चों के काम आ जायेंगे | आने वाले दिनों में कोई अच्छा काम करना है तो पैसे काम आयेगें | इतना ही नहीं, जो ग़रीब अपने ज़ेब में RuPay Card देखता है तो अमीरों की बराबरी में अपने आपको पाता है कि उनके ज़ेब में भी credit card है, मेरी ज़ेब में भी RuPay Card है - वो एक सम्मान का भाव महसूस करता है | प्रधानमंत्री जन-धन योजना में हमारे ग़रीबों के द्वारा क़रीब 65 हज़ार करोड़ रूपया बैंकों में जमा हुआ है | एक प्रकार से ग़रीब की ये बचत है, ये आने वाले दिनों में उसकी ताक़त है | और प्रधानमंत्री जन-धन योजना के साथ जिसका account खुला, उसको insurance का भी लाभ मिला है | ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’, ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ - एक रुपया, तीस रूपया बहुत मामूली सा premium आज वो ग़रीबों की ज़िन्दगी में एक नया विश्वास पैदा करता है | कई परिवारों में, एक रूपये के बीमे के कारण जब ग़रीब आदमी पर संकट आया, परिवार के मुखिया का जीवन अंत हो गया, कुछ ही दिनों में उसे 2 लाख रूपये मिल गए | ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’, ‘Start Up योजना’, ‘Stand Up योजना’ - दलित हो, आदिवासी हो, महिला हो, पढ़-लिख करके निकला हुआ नौज़वान हो, अपने पैरों पर खड़े होकर कुछ करने का इरादा वाले नौज़वान हो, करोड़ों-करोड़ों नौज़वानों को ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ से, बैंकों से बिना कोई गारन्टी पैसे मिले और वो स्वयं अपने पैरों पर खड़े हुए इतना ही नहीं, हर किसी ने एक-आध, एक-आध दो को रोज़गार देने का सफ़ल प्रयास भी किया है | पिछले दिनों बैंक के लोग मुझे मिले थे, जन-धन योजना के कारण, insurance के कारण, RuPay Card के कारण, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण, सामान्य लोगों को कैसा लाभ हुआ है उसका उन्होंने सर्वे करवाया और बड़ी प्रेरक घटनायें मिली | आज इतना समय नहीं है लेकिन मैं ज़रूर ऐसी घटनाओं को bank के लोगों से कहूँगा कि वो MyGov.in पर उसको upload करें, लोग पढ़ें, लोगों को उससे प्रेरणा मिलेगी कि कोई योजना, व्यक्ति के जीवन में कैसे transformation लाता है, कैसे नयी ऊर्जा भरता है, कैसे नया विश्वास भरता है, इसके सैकड़ों उदाहरण मेरे सामने आये हैं | आप तक पहुँचाने का मैं पूरा प्रयास करूँगा और ऐसी प्रेरक घटना है कि media के लोग भी इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं | वे भी ऐसे लोगों से interview करके नई पीढ़ी को नई प्रेरणा दे सकते हैं |
    मेरे प्यारे देशवासियो, फिर एक बार आपको मिच्छामी दुक्कड़म | बहुत-बहुत धन्यवाद |
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Sunday, 30 July 2017

‘मन की बात’ प्रसारण तिथि: 30.07.2017

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिये बड़ा लुभावना काल होता है | पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति - हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं | लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है | प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें, उसका भीषण स्वरूप, बहुत विनाश कर देता है | बदलते हुए मौसम-चक्र और पर्यावरण में जो बदलाव आ रहा है, उसका बड़ा ही negative impact भी हो रहा है | पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, North-East, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से, अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है | बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पूरी monitoring हो रही है | व्यापक स्तर पर राहत कार्य किए जा रहे हैं | जहाँ हो सके, वहाँ मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं | राज्य सरकारें भी अपने--अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं | सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं | भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, NDRF के लोग हों, paramilitary forces हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं | बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है | फसलों, पशुधन, infrastructure, roads, electricity, communication links सब कुछ प्रभावित हो जाता है |  खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फ़सलों को, खेतों को जो नुकसान होता है, तो इन दिनों तो हमने insurance कंपनियों को और विशेष करके crop insurance कंपनियों को भी proactive होने के लिये योजना बनाई है, ताकि किसानों के claim settlement तुरंत हो सकें | और बाढ़ की परिस्थिति को निपटने के लिये 24x7 control room helpline number 1078 लगातार काम कर रहा है | लोग अपनी कठिनाइयाँ बताते भी हैं | वर्षा ऋतु के पूर्व अधिकतम स्थानों पर mock drill करके पूरे सरकारी तंत्र को तैयार किया गया | NDRF की टीमें लगाई गईं | स्थान-स्थान पर आपदा-मित्र बनाना और आपदा-मित्र के do’s & don’ts की training करना, volunteers तय करना, एक जन-संगठन खड़ा कर-करके ऐसी परिस्थिति में काम करना | इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, अब technology इतनी आगे बढ़ी है, space science का भी बहुत बड़ा role रहा है, उसके कारण क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं | धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं |

जब भी मैं ‘मन की बात’ के लिये तैयारी करता हूँ, तो मैं देख रहा हूँ, मुझसे ज्यादा देश के नागरिक तैयारी करते हैं | इस बार तो GST को लेकर के इतनी चिट्ठियाँ आई हैं, इतने सारे phone call आए हैं और अभी भी लोग GST के संबंध में खुशी भी व्यक्त करते हैं, जिज्ञासा भी व्यक्त करते हैं | एक phone call मैं आपको भी सुनाता हूँ: -

“नमस्कार, प्रधानमंत्री जी, मैं गुड़गांव से नीतू गर्ग बोल रही हूँ | मैंने आपकी Chartered Accountants Day की speech सुनी और बहुत प्रभावित हुई | इसी तरह हमारे देश में पिछले महीने आज ही की तारीख़ पर Goods and Services Tax - GST की शुरुआत हुई | क्या आप बता सकते हैं कि जैसा सरकार ने expect किया था, वैसे ही result एक महीने बाद आ रहे हैं या नहीं? मैं इसके बारे में आपके विचार सुनना चाहूँगी, धन्यवाद |”

GST के लागू हुए क़रीब एक महीना हुआ है और उसके फ़ायदे दिखने लगे हैं | और मुझे बहुत संतोष होता है, खुशी होती है, जब कोई ग़रीब मुझे चिट्ठी लिखकर के कहता है कि GST के कारण एक ग़रीब की ज़रुरत की चीज़ों में कैसे दाम कम हुए हैं, चीज़ें कैसे सस्ती हुई हैं | अगर North-East, दूर-सुदूर पहाड़ों में, जंगलों में रहने वाला कोई व्यक्ति चिट्ठी लिखता है कि शुरू में डर लगता था कि पता नहीं क्या है; लेकिन अब जब मैं उसमें सीखने-समझने लगा, तो मुझे लगता है, पहले से ज़्यादा आसान हो गया काम | व्यापार और आसान हो गया | और सबसे बड़ी बात है, ग्राहकों का व्यापारी के प्रति भरोसा बढ़ने लगा है | अभी मैं देख रहा था कि transport and logistics sector पर कैसे GST का impact पड़ा | कैसे अब ट्रकों की आवाजाही बढ़ी है ! दूरी तय करने में समय कैसे कम हो रहा है ! highways clutter free हुए हैं |  ट्रकों की गति बढ़ने के कारण pollution भी कम हुआ है | सामान भी बहुत जल्दी से पहुँच रहा है | ये सुविधा तो है ही, लेकिन साथ-साथ आर्थिक गति को भी इससे बल मिलता है | पहले अलग-अलग tax structure होने के कारण transport and logistics sector का अधिकतम resources paperwork maintain करने में लगता था और उसको हर state के अन्दर अपने नये-नये warehouse बनाने पड़ते थे | GST - जिसे मैं Good and Simple Tax कहता हूँ, सचमुच में उसने हमारी अर्थव्यवस्था पर एक बहुत ही सकारात्मक प्रभाव और बहुत ही कम समय में उत्पन्न किया है | जिस तेज़ी से smooth transition हुआ है, जिस तेज़ी से migration हुआ है, नये registration हुए हैं, इसने पूरे देश में एक नया विश्वास पैदा किया है | और कभी-न-कभी अर्थव्यवस्था के पंडित, management के पंडित, technology के पंडित, भारत के GST के प्रयोग को विश्व के सामने एक model के रूप में research करके ज़रूर लिखेंगे | दुनिया की कई युनिवर्सिटियों के लिए एक case study बनेगा | क्योंकि इतने बड़े scale पर इतना बड़ा change और इतने करोड़ों लोगों के involvement के साथ इतने बड़े विशाल देश में उसको लागू करना और सफलतापूर्वक आगे बढ़ना, ये अपने-आप में सफलता की एक बहुत बड़ी ऊँचाई है | विश्व ज़रूर इस पर अध्ययन करेगा | और GST लागू किया है, सभी राज्यों की उसमें भागीदारी है, सभी राज्यों की ज़िम्मेवारी भी है | सारे निर्णय राज्यों ने और केंद्र ने मिलकर के सर्वसम्मति से किए हैं | और उसी का परिणाम है कि हर सरकार की एक ही प्राथमिकता रही कि GST के कारण ग़रीब की थाली पर कोई बोझ न पड़े | और GST App पर आप भलीभाँति जान सकते हैं कि GST के पहले जिस चीज़ का जितना दाम था, तो नई परिस्थिति में कितना दाम होगा, वो सारा आपके mobile phone पर available है | One Nation - One Tax, कितना बड़ा सपना पूरा हुआ | GST के मसले को मैंने देखा है कि जिस प्रकार से तहसील से ले करके भारत सरकार तक बैठे हुए सरकार के अधिकारियों ने जो परिश्रम किया है, जिस समर्पण भाव से काम किया है, एक प्रकार से जो friendly environment बना सरकार और व्यापारियों के बीच, सरकार और ग्राहकों के बीच, उसने विश्वास को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है | मैं इस कार्य से लगे हुए सभी मंत्रालयों को, सभी विभागों को, केंद्र और राज्य सरकार के सभी मुलाज़िमों को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ | GST भारत की सामूहिक शक्ति की सफलता का एक उत्तम उदाहरण है | यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है | और ये सिर्फ tax reform नहीं है, एक नयी ईमानदारी की संस्कृति को बल प्रदान करने वाली अर्थव्यवस्था है | एक प्रकार से एक सामाजिक सुधार का भी अभियान है | मैं फिर एक बार सरलतापूर्वक इतने बड़े प्रयास को सफल बनाने के लिए कोटि-कोटि देशवासियों को कोटि-कोटि वंदन करता हूँ |
    मेरे प्यारे देशवासियो, अगस्त महीना क्रांति का महीना होता है | सहज रूप से ये बात हम बचपन से सुनते आए हैं और उसका कारण है, 1 अगस्त, 1920 – ‘असहयोग आन्दोलन’ प्रारंभ हुआ | 9 अगस्त, 1942 – ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रारंभ हुआ, जिसे ‘अगस्त क्रांति’ के रूप में जाना जाता है और 15 अगस्त, 1947 - देश आज़ाद हुआ | एक प्रकार से अगस्त महीने में अनेक घटनायें आज़ादी की तवारीख़ के साथ विशेष रूप से जुड़ी हुई हैं | इस वर्ष हम ‘भारत छोड़ो’ ‘Quit India Movement’ इस आन्दोलन की 75वीं वर्षगाँठ मनाने जा रहे हैं | लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि ‘भारत छोड़ो’ - ये नारा डॉ. यूसुफ़ मेहर अली ने दिया था | हमारी नयी पीढ़ी को जानना चाहिए कि 9 अगस्त, 1942 को क्या हुआ था | 1857 से 1942 तक जो आज़ादी की ललक के साथ देशवासी जुड़ते रहे, जूझते रहे, झेलते रहे, इतिहास के पन्ने भव्य भारत के निर्माण के लिए हमारी प्रेरणा हैं | हमारे आज़ादी के वीरों ने त्याग, तपस्या, बलिदान दिए हैं, उससे बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है | ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का एक महत्वपूर्ण संघर्ष था | इसी आन्दोलन ने ब्रिटिश-राज से मुक्ति के लिये पूरे देश को संकल्पित कर दिया था | ये वो समय था, जब अंग्रेज़ी सत्ता के विरोध में भारतीय जनमानस हिंदुस्तान के हर कोने में, गाँव हो, शहर हो, पढ़ा हो, अनपढ़ हो, ग़रीब हो, अमीर हो, हर कोई कंधे-से-कंधा मिला करके ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ का हिस्सा बन गया था | जन-आक्रोश अपनी चरम सीमा पर था | महात्मा गाँधी के आह्वान पर लाखों भारतवासी ‘करो या मरो’ के मंत्र के साथ अपने जीवन को संघर्ष में झोंक रहे थे | देश के लाखों नौजवानों ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी, किताबें छोड़ दी थीं | आज़ादी का बिगुल बजा, वो चल पड़े थे | 9 अगस्त, ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ महात्मा गाँधी ने आह्वान तो किया, लेकिन सारे बड़े नेता अंग्रेज़ सल्तनत ने जेल में हर किसी को डाल दिया और वो कालखंड था कि देश में second generation की leadership ने - डॉ. लोहिया, जयप्रकाश नारायण जैसे महापुरुषों ने अग्रिम भूमिका निभाई थी |
    ‘असहयोग आन्दोलन’ और ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ 1920 और 1942 महात्मा गाँधी के दो अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं | ‘असहयोग आन्दोलन’ के रूप-रंग अलग थे और 42 की वो स्थिति आई, तीव्रता इतनी बढ़ गई कि महात्मा गाँधी जैसे महापुरुष ने ‘करो या मरो’ का मंत्र दे दिया | इस सारी सफलता के पीछे जन-समर्थन था, जन-सामर्थ्य थी, जन-संकल्प था, जन-संघर्ष था | पूरा देश एक होकर के लड़ रहा था | और मैं कभी-कभी सोचता हूँ, अगर इतिहास के पन्नों को थोड़ा जोड़ करके देखें, तो भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हुआ | 1857 से प्रारंभ हुआ स्वतंत्रता संग्राम 1942 तक हर पल देश के किसी-न-किसी कोने में चलता रहा | इस लम्बे कालखंड ने देशवासियों के दिल में आज़ादी की ललक पैदा कर दी | हर कोई कुछ-न-कुछ करने के लिये प्रतिबद्ध हो गया | पीढ़ियाँ बदलती गईं, लेकिन संकल्प में कोई कमी नहीं आई | लोग आते गए, जुड़ते गए, जाते गए, नये आते गए, नये जुड़ते गए और अंग्रेज़ सल्तनत को उखाड़ करके फेंकने के लिये देश हर पल प्रयास करता रहा | 1857 से 1942 तक के इस परिश्रम ने, इस आन्दोलन ने एक ऐसी स्थिति पैदा की कि 1942 इसकी चरम सीमा पर पहुँचा और ‘भारत छोड़ो’ का ऐसा बिगुल बजा कि 5 वर्ष के भीतर-भीतर 1947 में अंग्रेज़ों को जाना पड़ा | 1857 से 1942 - आज़ादी की वो ललक जन-जन तक पहुँची | और 1942 से 1947 - पाँच साल, एक ऐसा जन-मन बन गया, संकल्प से सिद्धि के पाँच निर्णायक वर्ष के रूप में सफलता के साथ देश को आज़ादी देने का कारण बन गए | ये पाँच वर्ष निर्णायक वर्ष थे |
अब मैं आपको इस गणित के साथ जोड़ना चाहता हूँ I 1947 में हम आज़ाद हुए I आज 2017 है I क़रीब 70 साल हो गए I सरकारें आईं-गईं I व्यवस्थायें बनीं, बदलीं, पनपीं, बढ़ीं I देश को समस्याओं से मुक्त कराने के लिये हर किसी ने अपने-अपने तरीक़े से प्रयास किए I देश में रोज़गार बढ़ाने के लिये, ग़रीबी हटाने के लिये, विकास करने के लिये प्रयास हुए I अपने-अपने तरीक़े से परिश्रम भी हुआ I सफलतायें भी मिलीं I अपेक्षायें भी जगीं I जैसे 1942 to 1947 संकल्प से सिद्धि के एक निर्णायक पाँच वर्ष थे I मैं देख रहा हूँ कि 2017 से 2022 - संकल्प से सिद्धि के और एक पांच साल का तबका हमारे सामने आया है I इस 2017 के 15 अगस्त को हम संकल्प पर्व के रूप में मनाएँ और 2022 में आज़ादी के जब 75 साल होंगे, तब हम उस संकल्प को सिद्धि में परिणत करके ही रहेंगे I अगर सवा-सौ करोड़ देशवासी 9 अगस्त, क्रांति दिवस को याद करके, इस 15 अगस्त को हर भारतवासी संकल्प करे, व्यक्ति के रूप में, नागरिक के रूप में - मैं देश के लिए इतना करके रहूँगा, परिवार के रूप में ये करूँगा, समाज के रूप में ये करूँगा, गाँव और शहर के रूप में ये करूँगा, सरकारी विभाग के रूप में ये करूँगा, सरकार के नाते ये करूँगा I करोड़ों-करोड़ों संकल्प हों | करोड़ों-करोड़ों संकल्प को परिपूर्ण करने के प्रयास हों I तो जैसे 1942 to 1947 पाँच साल देश को आज़ादी के लिए निर्णायक बन गए, ये पांच साल 2017 से 2022 के, भारत के भविष्य के लिए भी निर्णायक बन सकते हैं और बनाने हैं I पांच साल बाद देश की आज़ादी के 75 साल मनाएंगे I तब हम सब लोगों को दृढ़ संकल्प लेना है आज I 2017 हमारा संकल्प का वर्ष बनाना है I यही अगस्त मास संकल्प के साथ हमें जुड़ना है और हमें संकल्प करना है I गंदगी - भारत छोड़ो, ग़रीबी - भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार - भारत छोड़ो, आतंकवाद - भारत छोड़ो, जातिवाद - भारत छोड़ो, सम्प्रदायवाद - भारत छोड़ो I आज आवश्यकता ‘करेंगे या मरेंगे’ की नहीं, बल्कि नये भारत के संकल्प के साथ जुड़ने की है, जुटने की है, जी-जान से सफलता पाने के लिये पुरुषार्थ करने की है | संकल्प को लेकर के जीना है, जूझना है I आइए, इस अगस्त महीने में 9 अगस्त से संकल्प से सिद्धि का एक महाभियान चलाएं I प्रत्येक भारतवासी, सामाजिक संस्थायें, स्थानीय निकाय की इकाइयाँ, स्कूल, कॉलेज, अलग-अलग संगठन - हर एक New India के लिए कुछ-न-कुछ संकल्प लें I एक ऐसा संकल्प, जिसे अगले 5 वर्षों में हम सिद्ध कर के दिखाएँगे I युवा संगठन, छात्र संगठन, NGO आदि सामूहिक चर्चा का आयोजन कर सकते हैं I नये-नये idea उजागर कर सकते हैं I एक राष्ट्र के रूप में हमें कहाँ पहुंचना है? एक व्यक्ति के नाते उसमें मेरा क्या योगदान हो सकता है? आइए, इस संकल्प के पर्व पर हम जुड़ें I
मैं आज विशेष रूप से online world, क्योंकि हम कहीं हों या न हों, लेकिन online तो ज़रुर होते हैं; जो online वाली दुनिया है और खासकर के मेरे युवा साथियों को, मेरे युवा मित्रों को, आमंत्रित करता हूँ कि नये भारत के निर्माण में वे innovative तरीक़े से योगदान के लिए आगे आएँ I technology का उपयोग करते video, post, blog, आलेख, नये-नये idea - वो सभी बातें लेकर के आएँ I इस मुहिम को एक जन आंदोलन में परिवर्तित करें I NarendraModiApp पर भी युवा मित्रों के लिये Quit India Quiz launch किया जाएगा I यह quiz युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से परिचित कराने का एक प्रयास है I मैं मान रहा हूँ कि आप ज़रुर इसका व्यापक प्रचार करें, प्रसार करें I
मेरे प्यारे देशवासियो, 15 अगस्त, देश के प्रधान सेवक के रूप में मुझे लाल क़िले से देश के साथ संवाद करने का अवसर मिलता है I मैं तो एक निमित्त-मात्र हूँ I वहाँ वो एक व्यक्ति नहीं बोलता है I लाल क़िले से सवा-सौ करोड़ देशवासियों की आवाज़ गूँजती है I उनके सपनों को शब्दबद्ध करने की कोशिश होती है और मुझे ख़ुशी है कि पिछले 3 साल से लगातार 15 अगस्त निमित्त देश के हर कोने से मुझे सुझाव मिलते हैं कि मुझे 15 अगस्त पर क्या कहना चाहिए? किन मुद्दों को लेना चाहिए? इस बार भी मैं आपको निमंत्रित करता हूँ I MyGov पर या तो NarendraModiApp पर आप अपने विचार मुझे ज़रूर भेजिए I मैं स्वयं ही उसे पढ़ता हूँ और 15 अगस्त को जितना भी समय मेरे पास है, उसमें इसको प्रगट करने का प्रयास करूँगा I पिछले 3 बार के मुझे मेरे 15 अगस्त के भाषणों में एक शिकायत लगातार सुनने को मिली है कि मेरा भाषण थोड़ा लम्बा हो जाता है I इस बार मैंने मन में कल्पना तो की है कि मैं इसे छोटा करूँ I ज्यादा से ज्यादा 40-45-50 मिनट में पूरा करूँ I मैंने मेरे लिये नियम बनाने की कोशिश की है; पता नहीं, मैं कर पाऊँगा कि नहीं कर पाऊँगा I लेकिन मैं इस बार कोशिश करने का इरादा रखता हूँ कि मैं मेरा भाषण छोटा कैसे करूँ! देखते हैं, सफलता मिलती है कि नहीं मिलती है I
मैं देशवासियो, एक और भी बात आज करना चाहता हूँ | भारत की अर्थव्यवस्था में एक सामाजिक अर्थशास्त्र है | और उसको हमने कभी भी कम नहीं आँकना चाहिए | हमारे त्योहार, हमारे उत्सव, वो सिर्फ़ आनंद-प्रमोद के ही अवसर हैं, ऐसा नहीं है | हमारे उत्सव, हमारे त्योहार एक सामाजिक सुधार का भी अभियान हैं | लेकिन उसके साथ-साथ हमारे हर त्योहार, ग़रीब-से-ग़रीब की आर्थिक ज़िन्दगी के साथ सीधा सम्बन्ध रखते हैं | कुछ ही दिन के बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, उसके बाद गणेश उत्सव, उसके बाद चौथ चन्द्र, फिर अनंत चतुर्दशी, दुर्गा पूजा, दिवाली - एक-के-बाद, एक-के-बाद-एक और यही समय है जब ग़रीब के लिये, आर्थिक उपार्जन के लिये अवसर मिलता है | और इन त्योहारों में एक सहज स्वाभाविक आनंद भी जुड़ जाता है | त्योहार रिश्तों में मिठास, परिवार में स्नेह, समाज में भाईचारा लाते हैं | व्यक्ति और समाज को जोड़ते हैं | व्यक्ति से समष्टि तक की एक सहज यात्रा चलती है | ‘अहम् से वयम्’ की ओर जाने का एक अवसर बन जाती है | जहाँ तक अर्थव्यवस्था का सवाल है, राखी के कई महीनों पहले से सैकड़ों परिवारों में छोटे-छोटे घरेलू उद्योगों में राखियाँ बनाना शुरू हो जाती हैं | खादी से लेकर के रेशम के धागों की, न जाने कितनी तरह की राखियाँ और आजकल तो लोग homemade राखियों को ज्यादा पसंद करते हैं | राखी बनाने वाले, राखियाँ बेचने वाले, मिठाई वाले - हज़ारों-सैकड़ों का व्यवसाय एक त्योहार के साथ जुड़ जाता है | हमारे अपने ग़रीब भाई-बहन, परिवार इसी से तो चलते हैं | हम दीपावली में दीप जलाते हैं, सिर्फ़ वो प्रकाश-पर्व है, ऐसा ही नहीं है, वो सिर्फ़ त्योहार है, घर का सुशोभन है, ऐसा नहीं है | उसका सीधा-सीधा सम्बन्ध छोटे-छोटे मिट्टी के दिये बनाने वाले उन ग़रीब परिवारों से है | लेकिन जब आज मैं त्योहारों और त्योहार के साथ जुड़े ग़रीब की अर्थव्यवस्था की बात करता हूँ, तो साथ-साथ मैं पर्यावरण की भी बात करना चाहूँगा |
मैंने देखा है कि कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि मुझसे भी देशवासी ज़्यादा जागरूक हैं, ज़्यादा सक्रिय हैं | पिछले एक महीने से लगातार पर्यावरण के प्रति सजग नागरिकों ने मुझे चिट्ठियाँ लिखी हैं | और उन्होंने आग्रह किया है कि आप गणेश चतुर्थी में eco-friendly गणेश की बात समय से पहले बताइए, ताकि लोग मिट्टी के गणेश की पसंद पर अभी से योजना बनाएँ | मैं सबसे पहले तो ऐसे जागरूक नागरिकों का आभारी हूँ | उन्होंने मुझे आग्रह किया है कि मैं समय से पहले इस विषय पर कहूँ | इस बार सार्वजनिक गणेशोत्सव का एक विशेष महत्व है | लोकमान्य तिलक जी ने इस महान परम्परा को प्रारंभ किया था | ये वर्ष सार्वजनिक गणेशोत्सव का 125वाँ वर्ष है | सवा-सौ वर्ष और सवा-सौ करोड़ देशवासी - लोकमान्य तिलक जी ने जिस मूल भावना से समाज की एकता और समाज की जागरूकता के लिये, सामूहिकता के संस्कार के लिये सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारंभ किया था; हम फिर से एक बार गणेशोत्सव के इस वर्ष में निबंध स्पर्द्धायें करें, चर्चा सभायें करें, लोकमान्य तिलक के योगदान को याद करें | और फिर से तिलक जी की जो भावना थी, उस दिशा में हम सार्वजनिक गणेशोत्सव को कैसे ले जाएँ | उस भावना को फिर से कैसे प्रबल बनाएं और साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए eco-friendly गणेश, मिट्टी से बने हुए ही गणेश, ये हमारा संकल्प रहे | और इस बार तो मैंने बहुत जल्दी कहा है; मुझे ज़रूर विश्वास है कि आप सब मेरे साथ जुड़ेंगे और इससे लाभ ये होगा कि हमारे जो ग़रीब कारीगर हैं, ग़रीब जो कलाकार हैं, जो मूर्तियाँ बनाते हैं, उनको रोज़गार मिलेगा, ग़रीब का पेट भरेगा | आइए, हम हमारे उत्सवों को ग़रीब के साथ जोड़ें, ग़रीब की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ें, हमारे त्योहार का आनंद ग़रीब के घर का आर्थिक त्योहार बन जाए, आर्थिक आनंद बन जाए - ये हम सब का प्रयास रहना चाहिए | मैं सभी देशवासियों को आने वाले अनेकविद त्योहारों के लिये, उत्सवों के लिये, बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ |
    मेरे प्यारे देशवासियो, हम लोग लगातार देख रहे हैं कि शिक्षा का क्षेत्र हो, आर्थिक क्षेत्र हो, सामाजिक क्षेत्र हो, खेलकूद हो - हमारी बेटियाँ देश का नाम रोशन कर रही हैं, नई-नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रही हैं | हम देशवासियों को हमारी बेटियों पर गर्व हो रहा है, नाज़ हो रहा है | अभी पिछले दिनों हमारी बेटियों ने महिला क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया | मुझे इसी सप्ताह उन सभी खिलाड़ी बेटियों से मिलने का मौक़ा मिला | उनसे बातें करके मुझे बहुत अच्छा लगा, लेकिन मैं अनुभव कर रहा था कि World Cup जीत नहीं पाईं, इसका उन पर बड़ा बोझ था | उनके चेहरे पर भी उसका दबाव था, तनाव था | उन बेटियों को मैंने कहा और मैंने मेरा एक अलग मूल्यांकन दिया | मैंने कहा – देखिए, आजकल media का ज़माना ऐसा है कि अपेक्षायें इतनी बढ़ा दी जाती हैं, इतनी बढ़ा दी जाती हैं और जब सफ़लता नहीं मिलती है, तो वो आक्रोश में परिवर्तित भी हो जाती है | हमने कई ऐसे खेल देखे हैं कि भारत के खिलाड़ी अगर विफल हो गए, तो देश का ग़ुस्सा उन खिलाड़ियों पर टूट पड़ता है | कुछ लोग तो मर्यादा तोड़ करके कुछ ऐसी बातें बोल देते हैं, ऐसी चीज़ें लिख देते हैं, बड़ी पीड़ा होती है | लेकिन पहली बार हुआ कि जब हमारी बेटियाँ विश्व कप में सफ़ल नहीं हो पाईं, तो सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने उस पराजय को अपने कंधे पर ले लिया | ज़रा-सा भी बोझ उन बेटियों पर नहीं पड़ने दिया, इतना ही नहीं, इन बेटियों ने जो किया, उसका गुणगान किया, उनका गौरव किया | मैं इसे एक सुखद बदलाव देखता हूँ और मैंने इन बेटियों को कहा कि आप देखिए, ऐसा सौभाग्य सिर्फ़ आप ही लोगों को मिला है | आप मन में से निकाल दीजिए कि आप सफल नहीं हुए हैं | मैच जीते या न जीते, आप ने सवा-सौ करोड़ देशवासियों को जीत लिया है | सचमुच में हमारे देश की युवा पीढ़ी, ख़ासकर के हमारी बेटियाँ सचमुच में देश का नाम रोशन करने के लिए बहुत-कुछ कर रही हैं | मैं फिर से एक बार देश की युवा पीढ़ी को, विशेषकर के हमारी बेटियों को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ | शुभकामनायें देता हूँ |
    मेरे प्यारे देशवासियो, फिर एक बार स्मरण कराता हूँ अगस्त क्रान्ति को, फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ 9 अगस्त को, फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ 15 अगस्त को, फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ 2022, आज़ादी के 75 साल | हर देशवासी संकल्प करे, हर देशवासी संकल्प को सिद्ध करने का 5 साल का roadmap तैयार करे | हम सबको देश को नयी ऊँचाइयों पर पहुँचाना है, पहुँचाना है और पहुँचाना है | आओ, हम मिल करके चलें, कुछ-न-कुछ करते चलें | देश का भाग्य, भविष्य उत्तम हो के रहेगा, इस विश्वास के साथ आगे बढ़ें | बहुत-बहुत शुभकामनायें | धन्यवाद |

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