Monday, 1 January 2018

Director General,All India Radio,Shri F Sheheryar's New Year Message to his colleagues


Dear Colleagues,

                        As we bid farewell to 2017 and look forward to another eventful year, let me convey my best wishes to all my colleagues who stood by me through thick and thin.    I take this opportunity to share some thoughts with you.

                        As broadcast professionals, unrelenting pursuit of innovation should be our hallmark.  As Woody Allen quipped: “ If you are not failing every now and again, it’s a sign you are not doing anything very innovative”.   Do not hesitate to fail now and then in your pursuit of excellence.   

                        Let us reaffirm our faith in public service broadcasting as a potent instrument to serve a New India, especially  its  vibrant and vocal  youth who constitute bulk of the population. More than 65% of the population is below the age of 35.  The younger generation, with its energy and exuberance, is vastly different from the rest of the population in terms of their media habits and tastes, concerns and aspirations, life style and fantasies.  They are known to be heavy users of the smart phone and the internet, including the social media platforms. The mobile platform is becoming their primary choice today to consume content. Car Radios have also fuelled exposure to radio among those on the move. The question naturally arises :   How can AIR cultivate this vital segment of the population?    Unless   the programme as well as the engineering professionals   change their  mind-set   and woo the  young listener, AIR will cease to stay strong and relevant.   The need of the hour is to conceive and put out programmes that gel with young listeners,  coupled with a perky presentation style.   
                    I have been expressing concern about disquieting uniformity in the character and complexion of AIR’s channels.  AIR has the advantage of providing variety to the public depending upon their listening  habits and tastes.   Primary channel, Local Radio, VividhBharati, Rainbow and Gold have a distinct character.   Multi-channel stations should bear in mind that all these channels should not sound monotonously alike.

                                                                                                           



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                    Years of stagnation have left the creative professionals of AIR in the lurch. The year that  just ended has also failed  to bring any cheer. But kudos to  you all for your passion for broadcasting and unflinching commitment to Akashvani.  I suppose adversity does bring out the very best from creative and conscientious professionals.  I am an incurable optimist and am sure the new year will bring happy tidings. 

                   In the new year let us make a conscious attempt to function as a closely knit team of professionals, eschewing inter-disciplinary.  Let us all function  in a spirit of bonhomie as members of one large family and continue to serve every segment of the population imbued with a new spirit.

                  Over the years, we have been trying to strike the golden mean between public service broadcasting and resource mobilisation.  In today’s fiercely competitive media scenario, we have to stand out in terms of  reach, ratings, revenue and reputation.   I  am  happy that all my colleagues appreciate the need for mobilising resources internally not only to stay afloat but to flourish.  Keep up the good work in this direction.

                  I convey once again my best wishes  for a fruitful and cheerful  2018.


                                                                                                                                                                                                                                                                                  (F.Sheheryar)
                                                                                 Director General



                        

Sunday, 31 December 2017

मन की बात (39वीं कड़ी) प्रसारण तिथि: 31.12.2017

‘मन की बात’ (39वीं कड़ी)
प्रसारण तिथि: 31.12.2017,                         प्रसारण समय: प्रातः 11.00 बजे

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ का, इस वर्ष का यह आख़िरी कार्यक्रम है और संयोग देखिए कि आज, वर्ष 2017 का भी आख़िरी दिन है | इस पूरे वर्ष बहुत सारी बाते हमने और आपने share  की | ‘मन की बात’ के लिए आपके ढ़ेर सारे पत्र, comments , विचारों का ये आदान-प्रदान, मेरे लिए तो हमेशा एक नई ऊर्जा लेकर के आता है | कुछ घंटों बाद, वर्ष बदल जाएगा लेकिन हमारी बातों का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा | आने वाले वर्ष में हम, और नयी-नयी बातें करेंगे, नये अनुभव share करेंगे | आप सबको 2018 की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ | अभी पिछले दिनों 25 दिसम्बर को विश्वभर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया | भारत में भी लोगों ने काफी उत्साह से इस त्योहार को मनाया | क्रिसमस के अवसर पर हम सब ईसा मसीह की महान शिक्षाओं को याद करते हैं और ईसा मसीह ने सबसे ज़्यादा जिस बात पर बल दिया था, वह था - “सेवा-भाव” | सेवा की भावना का सार हम बाइबल में भी देखते हैं |

The Son of Man has come, not to be served,
But to serve,
And to give his life, as blessing
To all humankind.

यह दिखाता है कि सेवा का माहात्म्य क्या है ! विश्व की कोई भी जाति होगी, धर्म होगा, परम्परा होगी, रंग होंगे लेकिन सेवाभाव, ये मानवीय मूल्यों की एक अनमोल पहचान के रूप में है | हमारे देश में ‘निष्काम कर्म’ की बात होती है, यानी ऐसी सेवा जिसमें कोई अपेक्षा न हो | हमारे यहाँ तो कहा गया है – “सेवा परमो धर्मः” | ‘जीव-सेवा ही शिव-सेवा’ और गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस तो कहते थे – शिव-भाव से जीव-सेवा करें यानी पूरे विश्व में ये सारे समान मानवीय मूल्य हैं | आइए, हम महापुरुषों का स्मरण करते हुए, पवित्र दिवसों की याद करते हुए, हमारी इस महान मूल्य परम्परा को, नयी चेतना दें, नयी ऊर्जा दें और ख़ुद भी उसे जीने का प्रयास करें |

मेरे प्यारे देशवासियो, यह वर्ष गुरुगोविन्द सिंह जी का 350वाँ प्रकाश पर्व का भी वर्ष था | गुरुगोविन्द सिंह जी का साहस और त्याग से भरा असाधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है | गुरुगोविन्द सिंह जी ने महान जीवन मूल्यों का उपदेश दिया और उन्हीं मूल्यों के आधार पर उन्होंने अपना जीवन जिया भी | एक गुरु, कवि, दार्शनिक, महान योद्धा, गुरुगोविन्द सिंह जी ने इन सभी भूमिकाओं में लोगों को प्रेरित करने का काम किया | उन्होंने उत्पीड़न और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी | लोगों को जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ने की शिक्षा दी | इन प्रयासों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत कुछ गँवाना भी पड़ा | लेकिन उन्होंने कभी भी द्वेष की भावना को जगह नहीं दी | जीवन के हर-पल में प्रेम , त्याग और शांति का सन्देश - कितनी महान विशेषताओं से भरा हुआ उनका व्यक्तित्व था ! ये मेरे लिए सौभाग्य की बात रही कि मैं इस वर्ष की शुरुआत में गुरुगोविन्द सिंह जी 350वीं जयन्ती के अवसर पर पटनासाहिब में आयोजित प्रकाशोत्सव में शामिल हुआ |  आइए, हम सब संकल्प लें और गुरुगोविन्द सिंह जी की महान शिक्षा और उनके प्रेरणादायी जीवन से, सीख लेते हुए जीवन को ढालने का प्रयास करें |
     एक जनवरी, 2018 यानी कल, मेरी दृष्टि से कल का दिन एक special दिवस है | आपको भी आश्चर्य होता होगा, नया वर्ष आता रहता है, एक जनवरी भी हर वर्ष आती है, लेकिन जब, special की बात करता हूँ तो सचमुच में मैं कहता हूँ कि special है! जो लोग वर्ष 2000 या उसके बाद जन्मे हैं यानी 21वीं सदी में जिन्होंने जन्म लिया है वे एक जनवरी, 2018 से eligible voters बनना शुरू हो जाएँगे | भारतीय लोकतंत्र, 21वीं सदी के voters का, ‘New India Voters’ का स्वागत करता है | मैं, हमारे इन युवाओं को बधाई देता हूँ और सभी से आग्रह करता हूँ कि आप स्वयं को voter के रूप में register करें | पूरा हिन्दुस्तान आपको 21वीं सदी के voter के रूप में स्वागत करने के लिए लालायित है | 21वीं सदी के voter के नाते आप भी गौरव अनुभव करते होंगे | आपका वोट ‘New India’ का आधार बनेगा | वोट की शक्ति, लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति है | लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए वोट सबसे प्रभावी साधन है | आप केवल मत देने के अधिकारी नहीं बन रहे हैं | आप 21वीं सदी का भारत कैसा हो? 21वीं सदी के भारत के आपके सपने क्या हों? आप भी तो भारत की 21वीं सदी के निर्माता बन सकते हैं और इसकी शुरुआत एक जनवरी से विशेष रूप से हो रही है | और आज अपनी इस ‘मन की बात’ में, मैं 18 से 25 वर्ष के ऊर्जा और संकल्प से भरे हमारे यशस्वी युवाओं से बात करना चाहता हूँ | मैं इन्हें ‘New India Youth मानता हूँ | New India Youth का मतलब होता है - उमंग, उत्साह और ऊर्जा | मेरा विश्वास है कि हमारे इन ऊर्जावान युवाओं के कौशल और ताक़त से ही हमारा ‘New India का सपना सच होगा | जब हम नए भारत की बात करते हैं तो, नया भारत जो ये जातिवाद, साम्प्रदायवाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार के ज़हर से मुक्त हो | गन्दगी और ग़रीबी से मुक्त हो | ‘New India - जहाँ सभी के लिए समान अवसर हों, जहाँ सभी की आशा–आकांक्षाएँ पूरी हों | नया भारत, जहाँ शांति, एकता और सद्भावना ही हमारा guiding force हो | मेरा यह ‘New India Youth’ आगे आए और मंथन करे कि कैसे बनेगा New India | वो अपने लिए भी एक मार्ग  तय करे, जिनसे वो जुड़ा हुआ है उनको भी जोड़े और कारवाँ बढ़ता चले | आप भी आगे बढें , देश भी आगे बढ़े | अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो मुझे एक विचार आया कि क्या हम भारत के हर ज़िले में एक mock parliament आयोजित कर सकते हैं ? जहाँ ये 18 से 25 वर्ष के युवा, मिल-बैठ करके New India पर मंथन करें, रास्ते खोजें, योजनाएँ बनाएँ ? कैसे हम हमारे संकल्पों को 2022 से पहले सिद्ध करेंगें ? कैसे हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था ? महात्मा गाँधी ने आज़ादी के आंदोलन को जन-आन्दोलन बना दिया था | मेरे नौजवान साथियो, समय की माँग है कि हम भी 21वीं सदी के भव्य-दिव्य भारत के लिए एक जन-आन्दोलन खड़ा करें | विकास का जन-आन्दोलन | प्रगति का जन-आन्दोलन | सामर्थ्यवान-शक्तिशाली भारत का जन-आन्दोलन | मैं चाहता हूँ कि 15 अगस्त के आस-पास दिल्ली में एक Mock Parliament का आयोजन हो जहाँ प्रत्येक ज़िले से चुना गया एक युवा, इस विषय पर चर्चा करे कि कैसे अगले पाँच सालों में एक New India का निर्माण किया जा सकता है ? संकल्प से सिद्धि कैसे प्राप्त की जा सकती है ? आज युवाओं के लिए ढ़ेर सारे नये अवसर पैदा हुए हैं | Skill Development से लेकर के Innovation और entrepreneurship में हमारे युवा आगे आ रहे हैं और सफल हो रहे हैं | मैं चाहूँगा कि इन सारे अवसरों की योजनाओं की जानकारी इस ‘New India Youth’ को एक जगह कैसे मिले और इस बारे में कोई एक ऐसी व्यवस्था खड़ी की जाए ताकि 18 वर्ष का होते ही, उसे इस दुनिया के बारे में, इन सारी चीज़ों के बारे में सहज रूप से जानकारी प्राप्त हो और वह आवश्यक लाभ भी ले सके |
    मेरे प्यारे देशवासियो, पिछली ‘मन की बात’ में मैंने आपसे positivity के महत्व के बारे में बात की थी | मुझे संस्कृत का एक श्लोक याद आ रहा है –
उत्साहो बलवानार्य, नास्त्युत्साहात्परं बलम् |
सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम् ||

इसका मतलब होता है, उत्साह से भरा एक व्यक्ति अत्यन्त बलशाली होता है क्योंकि उत्साह से बढ़ कर कुछ नहीं होता | Positivity और उत्साह से भरे व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं | अंग्रेज़ी में भी लोग कहते हैं – ‘Pessimism leads to weakness, optimism to power’ | मैंने पिछली ‘मन की बात’ में देशवासियों से अपील की थी कि वर्ष 2017 के अपने positive moments, share करें और 2018 का स्वागत एक positive atmosphere में करें | मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि भारी संख्या में लोगों ने social media platform, MyGov और NarendraModi App पर बहुत ही positive response दिया, अपने अनुभव share किये | Positive India hashtag (#) के साथ  लाखों tweets किये गए जिसकी पहुँच करीब-करीब डेढ़-सौ करोड़ से भी अधिक लोगों तक पहुँची | एक तरह से positivity का जो संचार, भारत से आरंभ हुआ वह विश्व भर में फ़ैला | जो tweets और response आये वे सचमुच में inspiring थे | एक सुखद अनुभव था | कुछ देशवासियों ने इस वर्ष के उन घटनाक्रमों को साझा किया जिनका उनके मन पर विशेष प्रभाव पड़ा, सकारात्मक प्रभाव पड़ा| कुछ लोगों ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों को भी share किया |
साउंड बाईट #
# मेरा नाम मीनू भाटिया है | मैं मयूर विहार, पॉकेट-वन, फेज़ वन, दिल्ली में रहती हूँ | मेरी बेटी एम.बी.ए. करना चाहती थी | जिसके लिए मुझे बैंक से loan चाहिए था जो मुझे बड़ी आसानी से मिल गया और मेरी बेटी की पढ़ाई चालू रही | 
# मेरा नाम ज्योति राजेंद्र वाडे है | मैं बोडल से बात कर रही हूँ | हमने एक रुपया महीने का कटता वो बीमा था, ये मेरे पति ने करवाया हुआ था | और उनका accident में निधन हो गया था | उस समय हमारी क्या हालत हुई, हमको ही पता | सरकार की ये मदद से हमको बहुत लाभ हुआ और में थोड़ी संभली उससे   
# मेरा नाम संतोष जाधव है | हमारे गाँव से, भिन्नर गाँव से 2017 से National Highway गया है | उसकी वजह से हमारी सड़कें वो बहुत अच्छे हो गये और business भी बढ़ने वाला है |
# मेरा नाम दीपांशु आहूजा, मोहल्ला सादतगंज , ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ | दो घटनाएँ हैं जो हमारे भारतीय सैनिकों के द्वारा - एक तो पाकिस्तान में उनके द्वारा की गयी surgical strike जिससे कि आतंकवाद के launching pads थे, उनको नेस्तनाबूद कर दिया गया और साथ-ही-साथ हमारे भारतीय सैनिकों का डोकलाम में जो पराक्रम देखने को मिला वो अतुलनीय है |
# मेरा नाम सतीश बेवानी है | हमारे इलाके में पानी की समस्या थी बिलकुल पिछले 40 साल से हम आर्मी के पाइप -लाइन पर निर्भर हुआ करते थे | अब अलग से ये पाइप लाइन हुई है independent ..तो ये सब बड़ी उपलब्धि है हमारी 2017 में | 

   ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने-अपने स्तर पर ऐसे कार्य कर रहे हैं जिनसे कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है | वास्तव में, यही तो ‘New India है जिसका हम सब मिल कर निर्माण कर रहे हैं | आइए, इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों के साथ हम नव-वर्ष में प्रवेश करें, नव-वर्ष की शुरूआत करें और ‘positive India से ‘progressive India की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएँ | जब हम सब positivity की बात करते हैं तो मुझे भी एक बात share करने का मन करता है | हाल ही में मुझे कश्मीर के प्रशासनिक सेवा के topper अंजुम बशीर खान खट्टक ( Anjum Bashir Khan Khattak) की प्रेरणादायी कहानी के बारे में पता चला | उन्होंने आतंकवाद और घृणा के दंश से बाहर निकल कर Kashmir Administrative Service की परीक्षा में top किया है | आप ये जानकर के हैरान रह जाएंगे कि 1990 में आतंकवादियों ने उनके पैतृक-घर को जला दिया था | वहाँ आतंकवाद और हिंसा इतनी अधिक थी कि उनके परिवार को अपनी पैतृक-ज़मीन को छोड़ के बाहर निकलना पड़ा | एक छोटे बच्चे के लिए उसके चारों ओर इतनी हिंसा का वातावरण, दिल में अंधकारात्मक और कड़वाहट पैदा करने के लिए काफ़ी था - पर अंजुम ने ऐसा नहीं होने दिया | उन्होंने कभी आशा नहीं छोड़ी | उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना - जनता की सेवा का रास्ता | वो विपरीत हालात से उबर कर बाहर आए और सफलता की अपनी कहानी ख़ुद लिखी | आज वो सिर्फ जम्मू और कश्मीर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं | अंजुम ने साबित कर दिया है कि हालात कितने ही ख़राब क्यों न हों, सकारात्मक कार्यों के द्वारा निराशा के बादलों को भी ध्वस्त किया जा सकता है |      
    अभी पिछले हफ़्ते ही मुझे जम्मू-कश्मीर की कुछ बेटियों से मिलने का अवसर मिला | उनमें जो जज़्बा था, जो उत्साह था, जो सपने थे और जब मैं उनसे सुन रहा था, वो जीवन में कैसे-कैसे क्षेत्र में प्रगति करना चाहती हैं | और वो कितनी आशा-भरी ज़िन्दगी वाले लोग थे ! उनसे मैंने बातें की, कहीं निराशा का नामोनिशान नहीं था - उत्साह था, उमंग था, ऊर्जा थी, सपने थे, संकल्प थे | उन बेटियों से, जितना समय मैंने बिताया, मुझे भी प्रेरणा मिली और ये ही तो देश की ताकत हैं , ये ही तो मेरे युवा हैं, ये ही तो मेरे देश का भविष्य हैं |
    मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश के ही नहीं, जब भी कभी विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक-स्थलों की चर्चा होती है तो केरल के सबरीमाला मंदिर की बात होनी बहुत स्वाभाविक है | विश्व-प्रसिद्ध इस मंदिर में, भगवान अय्यप्पा स्वामी का आशीर्वाद लेने के लिए हर वर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं | जहाँ इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हों, जिस स्थान का इतना बड़ा माहात्म्य हो, वहाँ स्वच्छता बनाये रखना कितनी बड़ी चुनौती हो सकती है ? और विशेषकर उस जगह पर, जो पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित हो | लेकिन इस समस्या को भी संस्कार में कैसे बदला जा सकता है, समस्या में से उबरने का रास्ता कैसे खोजा जा सकता है और जन-भागीदारी में इतनी क्या ताक़त होती है- ये अपने आप में सबरीमाला मंदिर एक उदाहरण के तौर पर है | पी.विजयन नाम के एक पुलिस अफ़सर ने ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam), एक programme शुरू किया और उस programme के तहत, स्वच्छता के लिए जागरूकता का एक स्वैच्छिक-अभियान शुरू किया | और एक ऐसी परम्परा बना दी कि जो भी यात्री आते हैं, उनकी यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि वो स्वच्छता के कार्यक्रम में कोई-न-कोई शारीरिक श्रम न करते हों | इस अभियान में न कोई बड़ा होता है , न कोई छोटा होता है | हर यात्री, भगवान की पूजा का ही भाग समझ करके कुछ-न-कुछ समय स्वच्छता के लिए करता है, काम करता है, गन्दगी हटाने के लिए काम करता है | हर सुबह यहाँ सफाई का दृश्य बड़ा ही अद्भुत होता है और सारे तीर्थयात्री इसमें जुट जाते हैं | कितनी बड़ी celebrity क्यों न हो, कितना ही धनी व्यक्ति क्यों न हो, कितना ही बड़ा अफ़सर क्यों न हो, हर कोई एक सामान्य-यात्री के तौर पर इस ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam) कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं, सफाई को करके ही आगे बढ़ते हैं | हम देशवासियों के लिए ऐसे कई उदाहरण हैं | सबरीमाला में इतना आगे बढ़ा हुआ ये स्वच्छता - अभियान और उसमें ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam), ये हर यात्री के यात्रा का हिस्सा बन जाता है | वहाँ कठोर-व्रत के साथ स्वच्छता का कठोर-संकल्प भी साथ-साथ चलता है |
    मेरे प्यारे देशवासियो, 2 अक्तूबर 2014 पूज्य बापू की जन्म जयन्ती पर हम सब ने संकल्प किया है कि पूज्य बापू का जो अधूरा काम है यानी कि ‘स्वच्छ-भारत’, ‘गन्दगी से मुक्त-भारत’ | पूज्य बापू जीवन-भर इस काम के लिए जूझते रहे, कोशिश भी करते रहे | और हम सब ने तय किया कि जब पूज्य बापू की 150वीं जयंती हो तो उन्हें हम उनके सपनों का भारत, ‘स्वच्छ भारत’, देने की दिशा में कुछ-न-कुछ करें | स्वच्छता की दिशा में देशभर में व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहा है | ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जन-भागीदारी से भी परिवर्तन नज़र आने लगा है | शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर की उपलब्धियों का आकलन करने के लिए आगामी 4 जनवरी से 10 मार्च 2018 के बीच दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ किया जाएगा | ये सर्वे , चार हज़ार से भी अधिक शहरों में लगभग चालीस (40) करोड़ आबादी में किया जाएगा | इस सर्वे में जिन तथ्यों का आकलन किया जाएगा उनमें हैं – शहरों में खुले में शौच से मुक्ति, कूड़े का कलेक्शन, कूड़े को उठा कर ले जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीक़े से कूड़े की processing, behavioral change के लिए किए जा रहे प्रयास, capacity building और स्वच्छता के लिए किये गए innovative प्रयास और इस काम के लिए जन-भागीदारी | इस सर्वे के दौरान, अलग-अलग दल जा करके शहरों का inspection करेंगे | नागरिकों से बात करके उनकी प्रतिक्रिया लेंगे | स्वच्छता App के उपयोग का तथा विभिन्न प्रकार के सेवा-स्थलों में सुधार का analysis करेंगे | इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या ऐसी सारी व्यवस्था शहरों के द्वारा बनायी गई हैं जिनसे शहर की स्वच्छता एक जन-जन का स्वभाव बने, शहर का स्वभाव बन जाए | स्वच्छता, सिर्फ़ सरकार करे ऐसा नहीं | हर नागरिक एवं नागरिक संगठनों की भी बहुत बड़ी ज़िम्मेवारी है | और मेरी हर नागरिक से अपील है कि वे, आने वाले दिनों में जो स्वच्छता-सर्वे होने वाला है उसमें बढ़-चढ़ करके भाग लें | और आपका शहर पीछे न रह जाए, आपका गली-मोहल्ला पीछे न रह जाए - इसका बीड़ा उठाएं | मुझे पूरा विश्वास है कि घर से सूखा-कूड़ा और गीला-कूड़ा, अलग-अलग करके नीले और हरे dustbin का उपयोग, अब तो आपकी आदत बन ही गई होगी | कूड़े के लिए reduce, re-use  और re-cycle का सिद्धांत बहुत क़ारगर होता है | जब शहरों की ranking इस सर्वे के आधार पर की जाएगी - अगर आपका शहर एक लाख से अधिक आबादी का है  तो पूरे देश की ranking में, और एक लाख से कम आबादी का है तो क्षेत्रीय ranking में ऊँचे-से-ऊँचा स्थान प्राप्त करे, ये आपका सपना होना चाहिए, आपका प्रयास होना चाहिए | 4 जनवरी से 10 मार्च 2018,  इस बीच होने वाले स्वच्छता-सर्वेक्षण में, स्वच्छता के इस healthy competition में आप कहीं पिछड़ न जाएँ - ये हर नगर में एक सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना चाहिए | और आप सब का सपना होना चाहिए, ‘हमारा शहर- हमारा प्रयास’, ‘हमारी प्रगति-देश की प्रगति’ | आइए, इस संकल्प के साथ हम सब फिर से एक बार पूज्य बापू का स्मरण करते हुए स्वच्छ-भारत का संकल्प लेते हुए पुरुषार्थ की पराकाष्ठा करें |
मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ बातें ऐसी होती हैं जो दिखने में बहुत छोटी लगती हैं लेकिन एक समाज के रूप में हमारी पहचान पर दूर-दूर तक प्रभाव डालती रहती हैं | आज ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं आपके साथ ऐसी एक बात share करना चाहता हूँ | हमारी जानकारी में एक बात आयी कि यदि कोई मुस्लिम महिला, हज-यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह ‘महरम’ या अपने male guardian के बिना नहीं जा सकती है | जब मैंने इसके बारे में पहली बार सुना तो मैंने सोचा कि ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसे नियम किसने बनाए होंगें? ये discrimination क्यों? और मैं जब उसकी गहराई में गया तो मैं हैरान हो गया - आजादी के सत्तर (70) साल के बाद भी ये restriction लगाने वाले हम ही लोग थे | दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी | यहाँ तक कि कई इस्लामिक देशों में भी यह नियम नहीं है | लेकिन भारत में मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त नहीं था | और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार ने इस पर ध्यान दिया | हमारी Ministry of Minority Affairs ने आवश्यक कदम भी उठाए और ये सत्तर(70) साल से चली आ रही परंपरा को नष्ट कर के इस restriction को हमने हटा दिया | आज मुस्लिम महिलाएँ, ‘महरम’ के बिना हज के लिए जा सकती हैं और मुझे खुशी है कि इस बार लगभग तेरह सौ (1300) मुस्लिम महिलाएँ ‘महरम’ के बिना हज जाने के लिए apply कर चुकी हैं और देश के अलग-अलग भागों से- केरल से ले करके उत्तर तक महिलाओं ने बढ़-चढ़ करके हज-यात्रा करने की इच्छा ज़ाहिर की है | अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को मैंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभी महिलाओं को हज जाने की अनुमति मिले जो अकेले apply कर रही हैं | आमतौर पर हज-यात्रियों के लिए lottery system है लेकिन मैं चाहूँगा कि अकेली महिलाओं को इस lottery system से बाहर रखा जाए और उनको special category में अवसर दिया जाए | मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ और ये मेरी दृढ़ मान्यता है कि भारत की विकास यात्रा, हमारी नारी-शक्ति के बल पर, उनकी प्रतिभा के भरोसे आगे बढ़ी है और आगे बढ़ती रहेगी | हमारा निरंतर प्रयास होना चाहिए कि हमारी महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर समान अधिकार मिले, समान अवसर मिले ताकि वे भी प्रगति के मार्ग पर एक-साथ आगे बढ़ सकें |
मेरे प्यारे देशवासियो, 26 जनवरी हमारे लिए एक ऐतिहासिक-पर्व है | लेकिन इस वर्ष 26 जनवरी 2018 का दिन, विशेष रूप से याद रखा जाएगा | इस वर्ष गणतंत्र-दिवस समारोह के लिए सभी दस आसियान (ASEAN) देशों के नेता मुख्य-अतिथि के रूप में भारत आएँगे | गणतंत्र-दिवस पर इस बार ‘एक’ (1) नहीं बल्कि ‘दस’ (10) मुख्य अतिथि होंगे | ऐसा भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है | 2017, आसियान (ASEAN) के देश और भारत,दोनों के लिए ख़ास रहा है | आसियान (ASEAN) ने 2017 में अपने 50 वर्ष पूरे किए और 2017 में ही आसियान (ASEAN) के साथ भारत की साझेदारी के 25 वर्ष भी पूरे हुए हैं | 26 जनवरी को विश्व के 10 देशों के इन महान नेताओं का एक साथ शरीक़ होना हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है |
प्यारे देशवासियो, ये त्योहारों का season है | वैसे तो हमारा देश एक प्रकार से त्योहारों का देश है | शायद ही कोई दिवस ऐसा होगा जिसके नाम कोई त्योहार न लिखा गया हो | अभी हम सभी ने क्रिसमस मनाया है और आगे नया-वर्ष आने वाला है | आने वाला नव- वर्ष आप सभी के लिए ढ़ेरों खुशियाँ, सुख और समृद्धि ले करके आए | हम सब नए जोश, नए उत्साह, नए उमंग और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ें, देश को भी आगे बढाएँ | जनवरी का महीना सूर्य के उत्तरायण होने का काल है और इसी महीने में मकर-संक्रांति मनायी जाती है | यह प्रकृति से जुड़ा पर्व है | वैसे तो हमारा हर पर्व किसी-न-किसी रूप में प्रकृति से जुड़ा हुआ है लेकिन विविधताओं से भरी हमारी संस्कृति में,प्रकृति की इस अद्भुत घटना को अलग-अलग रूप में मनाने की प्रथा भी है | पंजाब और उत्तर-भारत में लोहड़ी का आनंद होता है तो यू.पी.-बिहार में खिचड़ी और तिल-संक्रांति की प्रतीक्षा रहती है | राजस्थान में संक्रांत कहें, असम में माघ-बिहू या तमिलनाडु में पोंगल - ये सभी त्योहार अपने आप में विशेष हैं और इनका अपना-अपना महत्व है | यह सभी त्योहार प्राय: 13 से 17 जनवरी के बीच में मनाए जाते हैं | इन सभी त्योहारों के नाम अलग-अलग, लेकिन इनका मूल-तत्व एक ही है - प्रकृति और कृषि से जुड़ाव | 
सभी देशवासियो को इन त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ हैं | एक बार फिर से आप सभी को नव-वर्ष 2018 की ढ़ेरों शुभकामनाएँ |
बहुत-बहुत धन्यवाद प्यारे देशवासियो | अब 2018 में फिर से बात करेंगे|
धन्यवाद |
*****  




Monday, 18 December 2017

MANN KI BAAT: AN OVERVIEW


1.1 Background
Hon’ble Prime Minister, Shri Narendra Modi, evolved a unique way to interact with the fellow countryman every month through the most potent medium of information dissemination-All India Radio, under the programme titled ‘Mann Ki Baat’. In this programme, he shares his views and thoughts candidly on the different themes with the people of India. This   is the first time in the history of Indian broadcasting when the Prime Minister of such a vast country chose All India Radio to voice his thoughts and concerns in such an informal and intimate way so that he could reach the unreached.  To ensure the maximum possible coverage, the  programme is broadcast by the entire AIR network encompassing Medium Wave, Short Wave, FM Rainbow/Gold, Vividh Bharati and Local Radio Stations; Regional language versions on respective regional networks of AIR; Doordarshan; Regional language versions on respective regional networks of Doordarshan;  Private Radio channels; Private television channels; DTH players; Doordarshan’s regional language versions; Audio broadcast on DTH (Free Dish); YouTube of All India Radio; AIR website and Live streaming on FM Gold, FM Rainbow, Vividh Bharati, Urdu Service etc.
The maiden episode of “Mann Ki Baat” went on air on the auspicious occasion of Vijaydashmi, on 3rd October 2014. Since then Thirty-Seven episodes have been broadcast. The latest thirty-seventh episode was broadcast on 29th October, 2017. Normally the programme is broadcast on Sunday. This day was deliberately chosen to reach the maximum number people being holiday. Details of the various episodes broadcast so far are as under:






“MANN KI BAAT”
S. No.
Date of Broadcast
Principal Theme
Reach (%)
Number
(In Millions)
1
3rd October-2014
Multiple themes
NA
NA
2
2nd November-2014
Multiple themes
29.0
133.4
3
14th December- 2014
Multiple themes
28.5
131.1
4
27th January-2015
Special Edition: Shares the platform with President Obama of USA
31.9
146.74
5
22nd February-2015
Students and exams
30.5
140.3
6
22nd March-2015
Welfare of farmers
31.8
146.28
7
26th April-2015
Nepal earthquake and relief measures
28.5
131.1
8
31st May-2015
Multiple themes
30.4
139.84
9
28th June-2015
Multiple themes
31.9
146.74
10
26th July-2015
Multiple themes
32.0
147.2
11
30th August-2015
Multiple themes
32.5
149.5
12
20th September-2015
Multiple themes
33.2
152.72
13
25th October-2015
Multiple themes
30.9
142.14
14
29th November-2015
Multiple themes
27.9
128.34
15
27th December-2015
Multiple themes
28.4
130.64
16
31st January-2016
Multiple themes
30.3
140.3
17
28th February
Multiple themes
29.3
134.78
18
27th March,2016
Multiple themes
27.7
127.42
19
24th April,2016
Multiple themes
29.4
135.24
20
22nd May,2016
Multiple themes
27.8
127.88
21
26th June,2016
Multiple themes
28.2
129.72
22
31st July,2016
Multiple themes
24.5
112.70
23
28th August,2016
Multiple themes
27.6
126.96
24
25th September,2016
Multiple themes
29.4
135.24
25
30th October,2016
Multiple themes
23.8
109.48
26
27th November,2016
Multiple themes
27.5
126.50
27
25th December,2016
Multiple themes
26.1
120.06
28
29th January,2017
Multiple themes
27.9
128.34
29
26th February,2017
Multiple themes
27.5
126.50
30
26th March,2017
Multiple themes
24.8
114.08
31
30th April ,2017
Multiple themes
28.8
114.08
32
28th May, 2017
Multiple themes
27.9
128.34
33
25th June, 2017
Multiple themes
26.6
122.36
34
30th July, 2017
Multiple themes
29.4
135.4
35
27th August, 2017
Multiple themes
29.1
133.86
36
24th September, 2017
Multiple themes
27.9
128.34
37
29th October,2017
Multiple themes
25.6
128.34
National Average
28.7
131.1

The above table shows that on an average 131.1 Million people are listening to PM’s ‘Mann Ki Baat” broadcast on the different channels of All India Radio.


Over the months, he touched upon many topics which nobody hither before considered important namely, issues like preparing for the exams, farmers problems, skill development, unity among the young people of the world, specially abled children, cleanliness, menace of drugs, road safety, organ donation and many more.  His uncanny ability to connect with the masses was laudable and the people admired his humility in inviting suggestions from the listeners and in seeking inputs for his Independence Day Speech.  

SIMULTANEOUS FEEDBACK:
Feedback is an important component of broadcast without which communication cycle is incomplete. With this in view, a system was evolved to get regular and quick feedback from the wide spectrum of audiences spread across the country. This could be made possible with the help of regular telephonic survey conducted by Audience Research Wing of All India Radio. Findings of the survey are given as under:

FINDINGS
In order to gather feedback of the people, a Quick Feedback Survey (QFS) was launched simultaneously from the second episode of “Mann Ki Baat” broadcast on 2nd November, 2014. On an average a sample of 100 respondents in the age group of 18 years and above is drawn randomly from each station’s primary coverage zone covering 27 stations spread over 21 states across the country. In this manner, 2700 respondents in all were covered in each survey, from both rural and urban areas.

Awareness and Listenership of "Mann Ki Baat"
S.No.
Date of B'Cast
Awareness (%)
Listenership (%)
1
2nd Nov-2014
55.6
29.0
2
14th Dec. 2014
53.6
28.5
3
27th Jan. 2015
57.9
31.9
4
22nd Feb.2015
60.8
30.5
5
22nd March-2015
59.7
31.8
6
26th April-2015
60.8
28.5
7
31st May-2015
58.6
30.4
8
28th June-2015
60.8
31.9
9
26th July-2015
61.5
32.0
11
30th August-2015
60.6
32.5
12
20th September-2015
64.8
33.2
13
25th October-2015
65.8
30.9
14
29th November-2015
64.8
27.9
15
27th December-2015
62.9
28.4
16
31st January-2016
65.5
30.3
17
28th Februry-2016
59.5
29.3
18
27th March,2016
61.5
27.7
19
24th April,2016
62.3
29.4
20
22nd May,2016
59.6
27.8
21
26th June,2016
57.7
28.2
22
31st July,2016
59.0
24.5
23
28th August,2016
60.1
27.6
24
25th September,2016
61.4
29.4
25
30th October,2016
58.5
23.8
26
27th November,2016
63.7
27.9
27
25th December,2016
65.0
26.1
28
29th January,2017
62.2
27.9
29
26th February,2017
60.7
27.5
30
26th  March,2017
63.5
24.8
31
30th  April,2017
64.6
28.8
32
28th May,2017
66.5
27.9
33
25th June,2017
64.3
26.6
34
30th July,2017
62.4
29.4
35
27th August.2017
62.6
29.1
36
24th September,2017
64.8
27.9
37
29th October,2017
65.3
25.6
Average
61.6
28.7


The above bar chart of awareness and listenership of programme “Mann Ki Baat” shows that, on an average, more than half of the population (65.3%) of the country were aware of the broadcast and 25.6% listened to it. In other words, approximately 50.0% of those who were aware of it listened to the programme. The highest listening (33.2%) was observed for the 20th September, 2015 broadcast. During the past thirty seven months, listening hovered around 30.0%. In the media scenario today, with high proliferation of radio/TV channels and attendant fragmentation of audiences, rating of 30.0% is admittedly high, a testimony to the enduring popularity of “Mann Ki Baat”.          
Estimated Number of Listeners on Different Media
The table given below shows the estimated number of listeners on different electronic media for each broadcast of “Mann Ki Baat” w.e.f 14th December, 2015, to 29th October, 2017, the data for earlier two broadcasts is not available. The national average of listeners of the above 37 broadcast comes out to be 248.90 Million. This means that on an average about 250 Million people are listening to “Mann Ki Baat” programme across the country, taking together all available electronic media. The table shows that maximum listening (306.24 Million) was recorded for 24th April, 2016 broadcast. The following table, shows that the reach of “Mann Ki Baat” have decreased on all the media units except on Private FM.
Month wise Number of Listeners of Mann Ki Baat on Different Media





(Figures are in Millions)
Date of Broadcast
AIR
Pvt. FM
DD
Pvt.TV
Internet/Social Media
Total
14th December-2014
131.1
20.7
40.5
14.72
7.2
214.22
27th January 2015
146.74
23.4
76.5
26.22
9.0
281.86
22nd February 2015
140.3
18.9
60.3
11.5
2.7
233.7
22nd March 2015
146.28
20.7
57.6
17.48
7.2
249.26
26th April 2015
131.1
06.3
70.2
10.58
7.2
225.38
31st May 2015
139.84
15.3
54.0
16.1
9.9
235.14
28th June 2015
146.74
28.8
84.6
20.7
9.9
290.74
26th July 2015
147.2
16.2
59.4
23
8.1
253.9
30th August 2015
149.5
18
60.3
17.48
4.5
249.78
20th September 2015
152.72
33.3
63.9
21.62
5.4
276.94
25th October 2015
142.14
17.1
66.6
19.32
2.7
247.86
29th November 2015
128.34
27
59.4
25.3
3.6
243.64
27th December 2015
130.64
17.1
52.2
17.48
6.3
223.72
31st January 2016
140.3
17.1
62.1
17.02
4.5
241.02
28th February
134.78
24.3
48.6
37.8
7.2
252.68
27th March,2016
127.42
18.0
59.4
40.5
7.2
252.52
24th April,2016
135.24
28.8
77.4
54.0
10.8
306.24
22nd May, 2016
127.88
18.9
61.2
41.4
1.8
251.18
26th June,2016
129.72
23.4
41.4
39.6
6.3
240.3
31st July,2016
112.70
18.0
56.7
36.9
21.6
245.9
28th August,2016
126.96
18.9
46.8
39.6
3.6
235.86
25th September,2016
135.24
33.3
54.9
47.7
5.4
276.54
30th October,2016
109.48
27.0
49.5
38.7
4.5
229.18
27th November,2016
126.50
27.9
64.8
56.7
14.4
275.9
25th December,2016
120.6
18.0
64.8
39.6
10.8
253.26
29th January,2017
128.34
21.6
46.8
50.4
5.4
252.54
26th February,2017
126.50
16.2
51.3
40.5
2.7
237.20
26th March,2017
114.08
16.2
45.0
40.5
7.2
222.98
30th April,2017
132.48
21.6
46.8
56.7
4.5
262.08
28th May,2017
128.34
20.7
48.6
38.7
1.8
238.14
25th June,2017
122.36
17.1
49.5
44.1
5.4
238.46
30th July,2017
135.24
16.2
52.2
42.3
11.7
257.64
27th August,2017
133.86
17.1
50.4
45.9
15.3
262.56
24th September,2017
128.34
17.1
49.5
41.4
9.0
245.34
29th October,2017
117.76
16.2
53.1
37.8
9.0
233.86
National Average
131.1
20.5
56.7
33.4
7.2
248.90







SOURCE OF LISTENING TO “MANN KI BAAT”
Source of Listening "Mann Ki Baat"                          (Figures are in %)
S.No.
Date of b'cast
AIR channels
Pvt. FM
DD
Pvt. TV
Internet/ Social Media
1
3rd October,2014
2
2nd November,2014
3
14th December,2014
18.2
2.3
4.5
3.2
0.8
4
27th January,2015
20.8
2.6
8.5
5.7
1
5
22nd Februray,2015
21.3
2.1
6.7
2.5
0.3
6
22nd March,2015
20.7
2.3
6.4
3.8
0.8
7
26thApril,2015
20.1
0.7
7.8
2.3
0.8
8
31st may,2015
20.8
1.7
6
3.5
1.1
9
28th June,2015
21.6
3.2
9.4
4.5
1.1
10
26th July,2015
21.1
1.8
6.6
5
0.9
11
30th August-2015
20.6
2
6.7
3.8
0.5
12
20th September-2015
21.6
3.7
7.1
4.7
0.6
13
25th October-2015
21.9
1.9
7.4
4.2
0.3
14
29th November-2015
20
3
6.6
5.5
0.4
15
27th December-2015
21.2
1.9
5.8
3.8
0.7
16
31st January-2016
19.6
1.9
6.9
3.7
0.5
17
28th February
19.4
2.7
5.4
4.2
0.8
18
27th March,2016
17.8
2.0
6.6
4.5
0.8
19
24th April,2016
20.0
3.2
8.6
6.0
1.2
20
22nd May,2016
19.3
2.3
6.1
5.9
0.5
21
26th June,2016
19.1
2.6
4.6
4.4
0.7
22
31st July,2016
20.0
2.2
6.3
4.1
0.8
23
28th August,2016
21.4
1.6
5.6
3.1
0.2
24
25th September,2016
21.0
3.7
6.1
5.3
0.6
25
30th October,2016
17.2
3.0
5.5
4.3
0.5
26
27th November,2016
19.5
3.1
7.2
6.3
1.6
27
25th December,2016
17.6
2.0
7.2
4.4
1.2
28
29th January,2017
18.9
2.4
5.2
5.6
0.6
29
26th February,2017
18.9
1.8
5.7
4.5
0.3
30
26th March,2017
19.5
1.8
5.0
4.5
0.8
31
30th April,2017
20.2
2.4
5.2
6.3
0.5
32
28th May,2017
21.4
2.3
5.4
4.3
0.2
33
25th June,2017
18.6
1.9
5.5
4.9
0.6
34
30th July,2017
21.4
1.8
5.8
4.7
1.3
35
27th August,2017
19.1
1.9
5.6
5.1
1.7
36
24th September,2017
19.6
1.9
5.5
4.6
1.0
37
29th October,2017
17.5
1.8
5.9
4.2
1.0
National Average
19.9
2.3
6.3
4.5
0.8




The above Bar Chart shows that AIR Channels was the main source of listening (19.9%) to “Mann Ki Baat” programme across all the episodes broadcast so far, followed by Doordarshan(6.3%), Private TV(4.5%),whereas Private FM Radio and Internet/Social Media gathered very less percentage  as a source of listening.